इसके तहत 15 अगस्त 2002 तक कुल 1,67,339 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें लगभग 24,198 हेक्टेयर भूमि पर कब्जों की बात सामने आई थी। धर्मशाला निवासी याचिकाकर्ता त्रिलोचन सिंह ने भी 8 अगस्त, 2002 को आवेदन किया था। उनका कहना है कि वे अवैध अतिक्रमणकारी नहीं हैं, बल्कि ग्राम पंचायत से उन्हें विधिसम्मत रूप से भूमि पट्टे पर मिली थी। वे पांच दशकों से वहीं निवास कर खेतीबाड़ी कर रहे हैं। आरोप लगाया कि हाईकोर्ट ने उनका पक्ष सुने बिना आदेश पारित किया, जिससे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ। अदालत ने मामले की सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देते हुए सरकार को निर्देश दिया कि अवैध कब्जा हटाने की प्रक्रिया 28 फरवरी तक कानून के अनुसार पूरी की जाए।