सुप्रीम कोर्ट ने पीटीए और पैरा शिक्षकों को जोरदार झटका दिया है। उच्चतम न्यायालय ने इन शिक्षकों को नियमित करने और अनुबंध पर लेने के मामले में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। ऐसे में उन पीटीए और पैरा शिक्षकों को फिलहाल न नियमित और न ही अनुबंध पर लिया जा सकेगा, जो नियमित या अनुबंध पर नहीं आ सके हैं।
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में प्रतिवादियों के अधिवक्ता विनोद शर्मा ने कोर्ट से जवाब के लिए छह सप्ताह का समय मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विक्रमजीत सेन और सी. नगप्पन की खंडपीठ ने वीरवार को पंकज कुमार वर्सेज स्टेट ऑफ एचपी याचिका की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिए कि वो हाईकोर्ट के नौ दिसंबर 2014 के निर्णय के बाद की यथास्थिति बनाए रखें।
याचिकाकर्ता ने रखी थी ये दलील
याचिकाकर्ता पंकज कुमार की ओर से कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण पेश हुए। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि स्टेट ऑफ कर्नाटक बनाम उमा देवी 2006 मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद एक कानून बना है।
उसके मुताबिक जो उम्मीदवार शैक्षणिक योग्यता नहीं रखते हैं, उन्हें सरकार किसी तरह नियमों में ढील देकर नियमित नहीं कर सकती है। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय की डबल बैंच ने नौ दिसंबर 2014 को अपने ही न्यायालय के सिंगल बैंच के फैसले को बदलते हुए सरकार की नियमितीकरण की नीति को जायज ठहराया था।
मंडी में 25 को बैठक करेंगे पैट
वहीं, प्राथमिक सहायक अध्यापक (पैट) 25 को मंडी में नियमितीकरण के मुद्दे पर चर्चा करेंगे। शिक्षकों का आरोप है कि हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद उन्हें नियमित नहीं किया जा रहा है, जबकि उन्हीं आदेशों के आधार पर पैरा शिक्षक नियमित हो गए और पीटीए को अनुबंध पर लाया गया है।
प्रदेश के विभिन्न स्कूलों में 3500 से अधिक पैट 11 साल तथा इससे अधिक समय से कार्यरत हैं। संघ के प्रदेश अध्यक्ष मदन ठाकुर और महासचिव जगमोहन राणा ने कहा कि हाईकोर्ट ने भी पैट को नियमित करने को सही कहा है। बावजूद सरकार और विभाग ने नियमितीकरण को लेकर कोई प्रक्रिया शुरू नहीं की है।
पैट को विभाग की ओर से ही डाइट केंद्रों में प्रशिक्षण दिया गया, लेकिन बाद में इसे रद्द कर दिया। अब फिर से दो वर्षीय प्रशिक्षण डाइट केंद्रों में ही करवाया जा रहा है। बार-बार के प्रशिक्षण से शिक्षकों का मानसिक और आर्थिक रूप से शोषण किया जा रहा है। मीडिया प्रभारी चंदन नेगी ने कहा कि 25 जनवरी को मंडी डाइट परिसर में संघ की प्रदेश स्तरीय आपात बैठक रखी गई है।
हिमाचल का होगा अपना वेतन आयोग
वहीं, मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि हिमाचल का अब अपना वेतन आयोग होगा। सरकार इस पर जल्द ही काम शुरू करेगी। हिमाचल अब बालिग हो गया है। हम दूसरे की जेब को देख कर कब तक खर्च करते रहेंगे?
ऊना में ‘प्रेस से मिलिए’ कार्यक्रम में वीरवार को सीएम ने कहा कि पंजाब के पे कमीशन को फॉलो करने की बजाय वह चाहते हैं हिमाचल अपना अलग वेतन आयोग गठित करे। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिमाचल में कर्मचारियों को सिर्फ एक साल के लिए सेवा विस्तार दिया गया था।
भविष्य में किसी तरह के सेवा विस्तार की योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार ने गलत फैसला लेते हुए संशोधित वेतन के लिए पंजाब सरकार की कैबिनेट सब कमेटी की सिफारिशों को लागू कर दिया। इससे हिमाचल को करीब 1400 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा है।