इराक की राजधानी बगदाद में भी 28 भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं। इसमें 12 हिमाचली भी हैं। हिमाचल के सुनील ने फोन पर बताया यहां धमाकें हो रहे हैं। ऐसे में वह बुरी तरह से डरे हुए हैं।
इराक में फंसे मुरारी देवी निवासी सुनील कुमार ने परिजनों को फोन पर बताया कि उनकी कंपनी उन्हें छोड़कर भाग गई है। अब वे राम भरोसे हैं। स्थानीय प्रशासन पाकिस्तानियों की मदद कर रहे हैं। सुनील ने केंद्र सरकार से मांग की है कि उन्हें जल्दी वापिस भेजने को लेकर उचित कदम उठाए जाएं।
हिंदुस्तानियों की सुध कोई नहीं ले रहा। इस क्षेत्र में अब सोशल मीडिया फेसबुक एवं अन्य सोशल मीडिया साइट पर भी पाबंदी लगा दी है। इन सभी युवाओं के सारे दस्तावेज कंपनी के पास हैं।
आदेश आएंगे तभी कार्यवाही करेगा दूतावास
यही नहीं यह अब तक कई बार भारतीय दूतावास के अधिकारियों से बात कर चुके हैं लेकिन अधिकारियों का कहना है कि जब उन्हें यहां के भारतीयों को वापिस भेजने के आदेश आएंगे।
वह भी उनकी कोई मदद कर सकते हैं। हैरानी इस बात की है कि इराक के कई क्षेत्रों में सत्ता सरकार के हाथों से निकल चुके हैं। मगर इसके बावजूद भारत सरकार भारतीयों को वापिस लाने में कोई पुख्ता कदम नहीं उठा पाई है।
इराक के मसईब में सदरतल इल इंडिया के तहत अलफराज कंपनी में काम करने वाले मंडी की हल्यातर पंचायत के युवक सुंदर लाल ने बताया कि उसके साथ 28 हिंदुस्तानी इस कंपनी में फंसे हैं। कंपनी का दिल्ली और बड़ोदा में कार्यालय है, लेकिन अभी कंपनी किसी को भी घर वापस भेजने में टाल मटोल कर रही है।
हमीरपुर और बिलासपुर के युवा भी फंसे
इराक की राजधानी बगदाद में मंडी के कई युवा फंस गए हैं तो वहीं प्रदेश के कई अन्य जिलों के युवा भी असमान्य परिस्थितियों में रहने को मजबूर है।
सुंदर लाल ने बताया कि कंपनी का कहना है कि यहां हालात ठीक हैं, लेकिन धमाकों की आवाजें उन्हें अपने आसपास सुनाई दे रही हैं। उनके साथ ही बिलासपुर के शाहतलाई, ऊना, हमीरपुर और सरकाघाट से भी युवा हैं।
सभी युवकों ने भारतीय दूतावास के अधिकारियों से संपर्क किया था लेकिन उन्हें निराशा भरा जवाब दिया गया। बताया कि दूतावास के अधिकारियों ने कहा कि जब आदेश मिलेंगे तो उन्हें यहां से निकाल लिया जाएगा।