हमेशा प्रथम श्रेणी में पास होने वाली अंजना ठाकुर शिक्षक बनने का सपना आंखों में संजोए हुए थीं, लेकिन यह घटना उसके लिए बड़ा सदमा था। अपना सपना पूरा करने के लिए अंजना ने अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान ही बाएं हाथ से लिखना सीखा। अस्पताल से छुट्टी के बाद फिर उसी कॉलेज में दाखिला लिया और अच्छे अंकों से बीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली।
बड़े भाई गंगेश कुमार ने बहन को आगे पढ़ाने के लिए अपनी पढ़ाई छोड़ दी और घर की आर्थिक मदद करने के लिए पेंटर का काम शुरू किया। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में एमएससी बॉटनी में प्रवेश लेने के बाद तो उसके हौसलों को पंख लग गए।
उसने पहले ही प्रयास में वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की अत्यंत कठिन जूनियर रिसर्च फैलोशिप (जेआरएफ) परीक्षा भी पास कर ली और अब अपना मुकाम हासिल किया।
उधर, विवि शिमला के कुलपति प्रोफेसर एसपी बंसल और उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने बधाई देते हुए कहा कि अंजना के संघर्ष और सफलता की कहानी सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है।