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रिपोर्ट में खुलासा, घरेलू ईंधन से ज्यादा जहरीली बन रही हवा

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वायु प्रदूषण को लेकर किए गए अध्ययन की ताजा रिपोर्ट सामने आ गई है। रिपोर्ट में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं जो सेहत के लिए घातक साबित हो सकती है। वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार सस्पेंडेड पर्टिकुलेट मैटर (एसपीएम) की अधिक मात्रा सेहत के लिए घातक है।
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हिमाचल प्रदेश में पहली बार उन कारणों को खोजा गया है, जिनका एसपीएम की बढ़ोतरी में सबसे अधिक योगदान है। हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचपीएसपीसीबी) की तरफ से पहली बार कराए गए इस अध्ययन में एसपीएम में आश्चर्यजनक रूप से सबसे अधिक योगदान घरेलू ईंधन से निकलने वाले धुएं का सामने आया है। ये धुंआ ही सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण का कारण बन रहा है।
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हो सकते हैं ये रोग

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), कानपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग की मदद से कराए गए अध्ययन के लिए प्रदेश में सबसे पहले सोलन जिले को चुना गया। एसपीएम की अधिक मात्रा हवा को जहरीला बनाती है।

हवा में सल्फर डाई आक्साइड, नाइट्रो आक्साइड जैसी गैसों के अधिक कण व्यक्ति को कान, गले और नाक से जुड़े रोग दे सकते हैं। बोर्ड ने इसके लिए एक निर्धारित मानक तय किया है। वायु में इसकी मात्रा कम करने के लिए जरूरी है कि घरेलू ईंधन का सही इस्तेमाल किया जाए।

जानिए प्रदूषण में किसका कितना योगदान
घरेलू ईंधन-55 प्रतिशत औद्योगिक आस्थान-26 फीसदी
सड़कों की स्थिति-10 प्रतिशत वाहनों की संख्या-7 फीसदी
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तीन साल में अध्ययन, 32.80 लाख खर्च

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से कराए गए इस अध्ययन की मियाद तीन साल रखी गई थी। अध्ययन वर्ष 2012 में शुरू हुआ था। इसकी अब रिपोर्ट आई है। इस अध्ययन पर कुल 32 लाख 80 हजार रुपये का खर्च आया है।

प्रदेश में पहली बार इस तरह का अध्ययन कराया गया है। अन्य जिलों में भी इस तरह का अध्ययन कराने का सुझाव दिया गया है। वित्तीय उपलब्धता के अनुसार केंद्र से हरी झंडी मिलने के बाद प्रदेश के दूसरे जिलों में भी यह अध्ययन कराया जा सकेगा।
- हितेंद्र शर्मा, वैज्ञानिक अधिकारी, हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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