500 किमी का सफर कर समझीं चट्टानों की संरचना संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजकीय डिग्री कॉलेज संजौली के भू-विज्ञान विभाग के 38 विद्यार्थियों ने शिमला से बारालाचा पास तक चार दिवसीय भू-वैज्ञानिक क्षेत्रीय भ्रमण किया। इस भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने हिमालय की भूगर्भीय संरचना और प्राकृतिक प्रक्रियाओं का अध्ययन किया। करीब 500 किलोमीटर की इस यात्रा का संचालन विभाग प्रभारी डॉ. लक्ष्मी वर्सेन के मार्गदर्शन में किया गया।
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने बाह्य हिमालय के शिवालिक क्षेत्र से लेकर लघु और उच्च हिमालय तक चट्टानों की संरचना में होने वाले बदलावों को समझा। बारालाचा पास में उन्होंने ग्रेनाइट, नीस, शिस्ट, क्वार्टजाइट और टेथियन हिमालय की तलछटी चट्टानों का अध्ययन किया। विद्यार्थियों ने दारचा के भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण कर पहाड़ी ढलानों की अस्थिरता और भूस्खलन के कारणों का अध्ययन किया। इसके अलावा वलन, भ्रंश, असंवाद, जलोढ़ पंखों, नदी वेदिकाओं और हिमनद निक्षेपों की पहचान की। भ्रमण प्रभारी डॉ. लक्ष्मी वर्सेन ने बताया कि जलवायु परिवर्तन, बादल फटने और अत्यधिक वर्षा की घटनाओं से हिमालय की संवेदनशीलता बढ़ रही है। ऐसे में वैज्ञानिक तरीके से पहाड़ी ढलानों का प्रबंधन करना और आपदा जोखिम को कम करना जरूरी है। प्रधानाचार्या डॉ. कामायनी बिष्ट ने कहा कि इस तरह के भ्रमण विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान करते हैं।