संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में दास्तानगोई कार्यक्रम के दूसरे दिन दास्तान-ए-कर्ण अज महाभारत प्रस्तुत की गई। शाम 5 बजे के बाद गौथिक हॉल में शुरू हुए इस दास्तान में महाभारत के प्रसिद्ध योद्धा कर्ण के जीवनगाथा पर गहन चिंतन किया गया।
महमूद फारूकी की लिखी दास्तान-ए-कर्ण अज़ महाभारत महान योद्धा कर्ण के जीवन की पुनर्कथन है, जो उर्दू, फ़ारसी, हिंदी और संस्कृत स्रोतों पर आधारित है। इसमें कर्ण के जन्म से लेकर उसकी मृत्यु तक के जीवन की खोज करते हुए प्रस्तुति के माध्यम से योद्धा की पीड़ा और सबसे महत्वपूर्ण रूप से उसकी त्रासदी को उजागर किया। दास्तानगोई उर्दू कहानी कहने का एक रूप है। इसे एक या दो लोगों द्वारा किया जाता है। इसमें कहानी कहने के लिए कविता और संगीत सहित कई तत्वों का संयोजन होता है। गेयटी थियेटर में भाषा एवं संस्कृति विभाग की ओर से गेयटी थियेटर में दो दिवसीय दास्तान के कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।