कोई जरूरत नी थी अमने जो बाहर जाणे दी। सब कुछ था घरे कमाई ने रखिया। पर मनी नी कुसी दी भी तिनीं। पौने चार वर्ष से इराक में लापता पोते की मौत की खबर सुनने के बाद अमन की दादी का रो-रोकर बुरा हाल है।
धर्मशाला के पास पास्सू गांव में घर के बरामदे में बैठीं अमन की दादी तारा देवी और माता बीना देवी उस दिन को कोस रही हैं, जब अमन इराक गया था। दादी ने अमन के फोटो को उठाकर गले लगाया और कहा कि हम चाहते थे, अमन यहीं पर काम करें। लेकिन, उसने किसी की नहीं सुनी।
दादी की बात के बीच अमन के पिता रमेश चंद कमरे से बाहर आए। उन्होंने बताया कि मंगलवार को वे सभी रोजमर्रा के कामों में लगे हुए थे। इसी बीच उन्हें फोन आना शुरू हुए कि टीवी में विदेश में गायब हुए लोगों के संबंध में खबर चल रही है।
इसी बीच पंजाब में नौकरी कर रहे अमन के बड़े भाई रमन का फोन आया और उन्होंने घर आने की बात कही। रमेश ने बताया कि रमन का मोबाइल नंबर केंद्र सरकार के पास है। शायद उसे सरकार से फोन आ गया होगा।
अमन की मां बीना देवी ने बताया कि अमन इराक जाने के बाद हर शुक्रवार को उन्हें फोन करता था। परिवार से अमन को बहुत लगाव था। मां ने बताया कि 13 जून 2014 को रमन को देर रात अमन का फोन आया।
उसने रमन को बताया कि हमें कुछ लोग बंदी बनाकर कहीं ले जा रहे हैं। लेकिन, रात को अंधेरा होने से उन्हें पता नहीं चल पा रहा है कि कहां लेकर जा रहे हैं। करीब एक घंटा बात होने के बाद फोन बंद हो गया और उसके बाद अमन से कभी भी किसी की बात नहीं हुई।
चाची बोलीं- विदेश मंत्री से लेकर डीसी तक मिले
अमन की चाची मधुबाला ने बताया कि ईराक में गुम हुए भारतीयों का पता लगाने के लिए दिल्ली में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के साथ मिले थे। इसके अलावा उपायुक्त, एसडीएम से लेकर अन्य अधिकारियों के साथ भी मिले। हाल ही में खाद्य आपूर्ति मंत्री किशन कपूर के माध्यम से सांसद शांता कुमार से मिले थे।
शोकाकुल परिवार को पटवारखाने बुलाता रहा पटवारी
मंगलवार सुबह टीवी पर समाचार चलने के बाद जहां अमन के परिवार वालों को ढांढस बंधाने वालों के फोन आने लगे, वहीं आस-पड़ोस वाले उनके घर एकत्रित हो गए। प्रशासन की ओर से कोई उनके घर नहीं पहुंचा। इतना ही नहीं अमन के परिवार वालों को पटवारी पटवारखाने बुलाता रहा।
पिता रमेश चंद और माता बीना देवी अपने पुत्र अमन को विदेश नहीं भेजना चाहते थे। वह चाहते थे कि बेटा यहीं पर रहकर अपने चाचा के साथ काम करे। हालांकि, बेटे की जिद्द के आगे माता-पिता की एक नहीं चली और 13 सितंबर 2013 को अमन ईराक में नौकरी करने चला गया।
पहले चंडीगढ़ में चलाता था जेसीबी
अमन को इराक में गए अभी एक साल भी नहीं बीता था कि 13 जून 2014 को रात को अमन ने अपने बड़े भाई को देर रात फोन करके अगवा होने की सूचना दी। इसके बाद अमन का कोई पता नहीं चला। ईराक जाने से पूर्व वह चंडीगढ़ में निजी कंपनी में नौकरी करता था। जेसीबी चलाने वाले अमन के माता-पिता को यह भी नहीं पता है कि वह विदेश में क्या नौकरी करता था।
पिता बोले- हमें सरकार ने सही सूचना नहीं दी
अमन के पिता रमेश चंद ने कहा कि यह हमारी लापरवाही है कि हम अपने बच्चों को विदेश नौकरी के लिए भेज रहे हैं। इसमें सरकार का कोई कसूर नहीं है। हमें सरकार से बस यही शिकायत है कि हमें उनके बारे में ठीक सूचना नहीं दी गई। अब एकाएक यह घोषणा कर दी।
27 साल की उम्र में गया था इराक
अमन जब विदेश नौकरी करने के लिए गया था तो उसकी आयु 27 साल की थी। अमन के घर में पिता रमेश, माता बीना देवी, दादी तारा देवी और बड़ा भाई रमन, भाभी और उनके दो बच्चे हैं जबकि बहन की शादी हो चुकी है।