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Sanjauli Mosque Case: संजौली मस्जिद तोड़ने पर में अब 5 जुलाई तक रोक, अदालत ने मामले को बहस योग्य माना

Thu, 29 May 2025 01:48 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला

सार

कोर्ट ने संजौली मस्जिद मामले को बहस योग्य माना और मस्जिद तोड़ने के नगर निगम आयुक्त कोर्ट के आदेशों पर रोक बरकरार रखी। 
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संजौली की मस्जिद। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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राजधानी शिमला की विवादित संजौली मस्जिद तोड़ने के नगर निगम (एमसी) आयुक्त के आदेशों पर लगाई रोक को सेशन कोर्ट ने 5 जुलाई तक बरकरार रखा है। एमसी ने वीरवार को अपील की सुनवाई में आपत्तियां लेते हुए जवाब दाखिल किया।
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कोर्ट में अपीलकर्ता और प्रतिवादी के अधिवक्ताओं ने पक्ष रखे। बहस में अपीलकर्ता ने तर्क पूर्ण मुद्दे उठाते हुए पक्ष रखा कि तथ्यात्मक स्थिति और दलीलों पर विचार किए बिना आदेश पारित किए थे। प्रतिवादी ने तर्क दिया कि अपीलकर्ता ने बिना पूर्व आवश्यक अनुमति के भवन का निर्माण किया है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश यजुवेंद्र सिंह की अदालत ने मस्जिद मामले को बहस योग्य माना और अपील के निपटारे तक नगर निगम आयुक्त के आदेशों के संचालन पर रोक को बरकरार रखा। अदालत ने यह मामला अब 5 जुलाई को बहस के लिए रखा है। हिमाचल प्रदेश वक्फ बोर्ड ने 17 मई को शिमला एमसी आयुक्त कोर्ट के 3 मई के पारित उन आदेशों को चुनौती दी है, जिसमें आयुक्त कोर्ट ने पूरी संजौली मस्जिद को गैर कानूनी बताते हुए नीचे की तीन मंजिलें भी तोड़ने के आदेश दिए थे।

19 मई को सुनवाई में अदालत ने मस्जिद कमेटी के प्रधान को कोर्ट में पेश होने के लिए सम्मन जारी किया था। साथ ही एमसी शिमला को सम्मन जारी करते हुए फैसले का रिकाॅर्ड तलब किया था लेकिन 23 मई को सुनवाई में न मस्जिद कमेटी के प्रधान उपस्थित हुए और न ही एमसी की तरफ से कोई अधिवक्ता। इसके बाद अदालत ने एमसी को दोबारा नोटिस में आयुक्त कोर्ट के फैसले का रिकाॅर्ड तलब करते हुए पेश होने को कहा था। इसके बाद 26 मई की सुनवाई में कोर्ट ने मस्जिद तोड़ने पर अंतरिम रोक लगाई। साथ ही एमसी ने ट्रायल कोर्ट/एमसी आयुक्त के फैसले का रिकाॅर्ड पेश करने के बाद जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा था। अदालत ने स्टे को अब 5 जुलाई तक जारी रखने के आदेश दिए हैं। मामले को बहस के लिए 5 जुलाई 2025 को सूचीबद्ध किया है।
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अब तक 50 से ज्यादा बार हो चुकी है सुनवाई
संजौली मस्जिद मामला करीब 16 साल तक शिमला के नगर निगम आयुक्त कोर्ट में चलता रहा। इस दौरान 50 से भी ज्यादा बार इस केस पर सुनवाई हुई। हाईकोर्ट के दखल के बाद इस केस में नगर निगम आयुक्त ने 3 मई को फैसला सुनाया था। इसमें आयुक्त ने पूरी मस्जिद को गैर कानूनी बताते हुए इसकी निचली दो मंजिल तोड़ने के आदेश दिए हैं। मस्जिद की ऊपर की तीन मंजिलें तोड़ने के आदेश बीते साल 5 अक्तूबर को दिए जा चुके हैं। हालांकि आयुक्त कोर्ट ने इसे तोड़ने के आदेश देने से पहले वक्फ बोर्ड को कई बार मस्जिद की जमीन पर मालिकाना हक के कागज देने और मस्जिद का नक्शा देने का मौका दिया था लेकिन वक्फ बोर्ड इसके कागज पेश नहीं कर पाया। इसके साथ ही मस्जिद का नक्शा और किसी भी तरह की एनओसी भी मस्जिद कमेटी ने निगम कोर्ट को नहीं दी। वक्फ बोर्ड लंबे समय तक जमीन पर मालिकाना हक का दावा करता रहा है।
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