हिमाचल प्रदेश के अस्थायी कर्मचारियों को अनुबंध पर लाने के मामले को फिलहाल रोक दिया गया है। मामला प्रशासनिक ट्रिब्यूनल में जाने के बाद अटक गया है, जिसके बाद इन अस्थायी कर्मचारियों को अनुबंध पर नहीं लिया जा रहा है। हिमाचल सरकार के तकनीकी शिक्षा निदेशालय ने सभी अधीनस्थ कार्यालयों से इसका रिकॉर्ड मंगवा लिया था, मगर विवाद सुलझने तक फिलहाल इन कर्मचारियों को अनुबंध पर नहीं लाया जा सकेगा।
सरकार ने सात साल या अनुबंध के 9600 घंटे पूरे करने वाले कर्मचारियों को अनुबंध पर लाने का निर्णय लिया था। एक हजार से ज्यादा अस्थायी कर्मचारी इंजीनियरिंग, बी फार्मा, बहु तकनीकी और आईटीआई संस्थानों में कार्यरत हैं। अक्तूबर 2015 में सरकार ने एक अधिसूचना जारी की थी कि जो भी कर्मचारी एनसीवीटी, एआईसीटीई या आरएंडपी नियमों के तहत संलग्न या नियुक्त किए गए हैं, उन्हें अनुबंध पर लिया जा सकता है।
बशर्ते ऐसे कर्मचारियों ने 31 जुलाई 2015 तक सात साल का सेवाकाल पूरा कर लिया हो या फिर सेवाकाल के 9600 घंटे पूरे कर लिए हों। इन सभी संस्थानों के तमाम निदेशकों और प्रधानाचार्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे व्यक्तिगत फाइलों को तैयार करें। इन सबका रिकॉर्ड आठ जनवरी 2016 से पहले मांगा गया था।
सभी पात्र कर्मचारियों के दस्तावेजों के नहीं मिलने पर इस तिथि को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया था। इनमें नियुक्ति पत्र, बीच में सेवा समाप्ति, अवकाश, जन्म प्रमाणपत्र, शैक्षणिक योग्यता प्रमाणपत्र, अनुभव प्रमाणपत्र, श्रेणी प्रमाणपत्र, कोर्ट केस, उम्मीदवार से ली गई अंडरटेकिंग का विवरण और अन्य प्रमाण पत्रों का भी ब्योरा मांगा गया है।
तकनीकी शिक्षा निदेशक राजेश्वर गोयल ने कहा कि सात साल या 9600 घंटे पूरा करने या वाले अस्थायी कर्मचारियों को अनुबंध पर लेने का निर्णय लिया गया है। इनका ब्योरा भी मांगा गया है। पर मामला ट्रिब्यूनल में जाने के बाद इन कर्मचारियों को अनुबंध पर लेने की प्रक्रिया को फिलहाल रोकना पड़ा है। मामला सुलझने के बाद ही इस पर निर्णय होगा।