हिमाचल प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष एसएस जोगटा ने सरकार से मांग की है कि हिमाचल प्रशासनिक ट्रिब्यूनल बंद करने की अधिसूचना तुरंत वापस ली जाए। कर्मचारियों को टाइम स्केल देने, संशोधन वेतनमान और वेतन विसंगतियां दूर करने की भी मांग की है।
जोगटा ने शनिवार को प्रेस सम्मेलन में कहा कि वह भले ही दो माह पहले रिटायर हो गए हैं, परंतु उन्होंने अभी अध्यक्ष पद नहीं छोड़ा है। सरकार से मान्यता प्राप्त महासंघ अध्यक्ष चुनकर आता है तो उसे संगठन का पूरा हिसाब किताब दे दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि महासंघ पांच गुटों में बंट गया है। कर्मचारी नेता अपने हितों को साधने में लगे हैं। कहा कि महासंघ के अध्यक्ष होने का दावा कर रहे विनोद कुमार पहले परिसंघ के पदाधिकारी रहे हैं। विनोद कभी महासंघ के प्राथमिक सदस्य तक नहीं रहे।
इन जैसे नेताओं ने सरकार को गुमराह किया और प्रशासनिक ट्रिब्यूनल को बंद करवा दिया। वर्ष 1985 में तत्कालीन वीरभद्र सरकार ने प्रदेश के कर्मचारियों के हितों के लिए ट्रिब्यूनल खोला था। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने प्राधिकरण को बंद किया और उनकी सरकार चली गई।
अब जयराम सरकार ने वर्ष 2019 में ट्रिब्यूनल को बंद करके कर्मचारी अहित किया। अब वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में इसके परिणाम भी सामने आ जाएंगे। इस मामले में महासंघ के कुछ नेताओं सरकार को गुमराह किया है।