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राजभवन में फिर अटक सकता है खेल वियेधक, जानें क्यों?

Wed, 19 Aug 2015 10:30 AM IST
सुरेश शांडिल्य/अमर उजाला, शिमला
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बहुचर्चित स्पोर्ट्स बिल एक बार फिर लंबे समय तक राजभवन में अटक सकता है। इस पर राजस्थान के गवर्नर कल्याण सिंह ने भी हिमाचल का कार्यकारी राज्यपाल रहते हुए कोई फैसला नहीं लिया। प्रदेश विधानसभा में यह विधेयक बजट सत्र में ही पारित हो गया था। बाद में इसे सरकार ने राज्यपाल की मंजूरी को भेजा।
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तत्कालीन कार्यकारी राज्यपाल कल्याण सिंह ने 12 जून को इसे सरकार को वापस भेजकर इस पर टिप्पणी मांगी थी। इस बिल के दायरे में क्रिकेट सहित 42 खेल संगठनों को लाया गया है। इसी वर्ष प्रदेश विस के बजट सत्र में हिमाचल में सत्तासीन कांग्रेस सरकार ने बहुचर्चित खेल विधेयक पारित किया। विपक्ष में बैठी भाजपा के भारी विरोध के बावजूद यह बिल पारित कर दिया गया।

भाजपा इस विधेयक को लाने का सरकार का मकसद हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (एचपीसीए) पर शिकंजा कसना ही मानती रही है। इसीलिए इसका विरोध भी कर रही है। अभी तक राज्य में क्रिकेट या कई अन्य खेलों से जुडे़ संगठनों को नियंत्रित करने के लिए सरकार का अपना कोई कानून नहीं है। अप्रैल में बजट सत्र में इस बिल को भारी हंगामे के बीच पारित करने के बाद इसे कार्यकारी राज्यपाल कल्याण सिंह को मंजूरी के लिए भेजा गया।
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कल्याण सिंह ने एचपीसीए की ओर से उठाई गई आपत्तियों पर कमेंट भेजने के लिए इसे वापस सरकार को भेजा था। बाद में राज्य सरकार ने इस पर इसे साबित करती टिप्पणी भेजी कि इसके दायरे में क्रिकेट सहित अन्य खेलों को लाना क्यों जरूरी है। फिर यह विधेयक राजभवन शिमला से जयपुर के लिए राज्यपाल कल्याण सिंह के पास भेजा गया।

इसी बीच राज्य में नए राज्यपाल की नियुक्ति हो गई। नए राज्यपाल आचार्य देवव्रत के शपथ लेने से पहले ही कार्यकारी राज्यपाल ने बिना फैसला लिए ही यह बिल राजभवन शिमला को लौटा दिया। जानकारों की मानें तो अब नए राज्यपाल आचार्य देवव्रत भी इस बिल को लंबे समय तक राजभवन में अटका सकते हैं। संभव है कि इस पर वह भी जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लेंगे।
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