जल शक्ति विभाग और प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। जल शक्ति विभाग की ओर से भी पानी की सैंपलिंग की गई। बुधवार शाम को गिरि के पानी में जो सफेद तरल पदार्थ छोड़ा था, वह जल शक्ति विभाग के टैंकों और पंपिंग मशीनरी में भी चिपक गया था। इसके चलते वीरवार को इन टैंकों को खाली करवा कर साफ करवाना पड़ा। प्रोसेसिंग प्लांट से जुड़े लोगों ने दावा किया कि यह तरल पदार्थ ट्रीटमेंट के बाद ही गिरि में छोड़ा है। यह सेब का बचा हुआ अपशिष्ट है। इससे सेहत को कोई नुकसान नहीं होगा। हालांकि जल शक्ति विभाग ने मौके पर पानी के सैंपल भरवाए। देर शाम इसकी रिपोर्ट आ गई है। इसमें पानी में किसी तरह का केमिकल नहीं पाया गया है। दो और रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। इस क्षेत्र के जल शक्ति विभाग के सहायक अभियंता महबूब शेख ने कहा कि गिरि के सैंपल की रिपोर्ट दुरुस्त आई है। शुक्रवार से मतियाना और ठियोग के लिए पानी की आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी।
गिरि परियोजना के सैंपल भी ठीक
नगर निगम महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि पेयजल कंपनी ने भी गिरि से पानी के सैंपल भरे हैं। भेखलटी और संजौली टैंक के भी सैंपल लिए हैं। सबकी रिपोर्ट ठीक आई है। शहर के लिए पानी की आपूर्ति जारी है। शहर की जनता को घबराने की जरूरत नहीं है। गिरि से क्लोरिनेशन के बाद ही शिमला के लिए पानी की आपूर्ति की जाती है।
प्लांट से नहीं निकलता हानिकारक केमिकल
एचपीएमसी ने गिरि के पानी में सफेद तरल पदार्थ छोड़े जाने के मामले को लेकर दावा किया है कि पराला प्लांट से कोई भी हानिकारक केमिकल बाहर नहीं निकलता। एचपीएमसी के प्रबंध निदेशक सुदेश कुमार मोक्टा ने वीरवार को मौके का निरीक्षण किया।कहा कि अभी इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि यह पानी में सफेद तरल पदार्थ हमारे प्लांट से निकले ट्रीट होकर निकले व्यर्थ पदार्थ के हैं या कुछ और। यदि गिरि के पानी में मिला सफेद तरल पदार्थ उनके प्लांट से निकले व्यर्थ पदार्थ का है, तो कमियों का दूर किया जाएगा।