उर्वरकों की अत्यधिक, असंतुलित और अपर्याप्त खुराक के परिणामस्वरूप मिट्टी में किसी पोषक तत्व की कमी या विषाक्तता हो सकती है इसलिए बगीचे की पोषण स्थिति का मूल्यांकन करना आवश्यक है। डॉ. शर्मा ने बताया कि जिन बगीचों में अधिक उत्पादन हुआ है वहां सेब तुडान के तुरंत बाद बगीचे में यूरिया का एक प्रतिशत (2 किलो / 200 लीटर पानी) छिड़काव करें। आम तौर पर सेब के बगीचों में फास्फोरस और पोटाश उर्वरक दिसंबर और जनवरी महीने के दौरान डाले जाते हैं, इसलिए बागवानों को इससे पहले अपनी मिट्टी की जांच करानी चाहिए। बगीचों से मिट्टी के नमूने लेने का सबसे अच्छा समय सेब के तुड़ान के बाद होता है, इसलिए बागवान मिट्टी परीक्षण के लिए अक्टूबर में मिट्टी के नमूने ले सकते हैं।
बगीचों से इस तरह से लें नमूने
10-15 पेड़ों से 30 सेमी गहराई तक तोलिये से मिट्टी के नमूने लें। नमूनों को मिलाएं। लकड़ी से इसे चार बराबर भागों में बांटे। फिर मिट्टी के विपरीत भागों में हटा दें। शेष मिट्टी को मिलाएं और यह प्रक्रिया मिट्टी के लगभग 250-300 ग्राम रहने तक दोहराएं। इसके बाद नमूने को छाया में सुखाएं। विश्लेषण के लिए मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला में जमा करवा दें। नमूने बगीचे में उर्वरक या जैविक खाद डालने से पहले एकत्र किए जाने चाहिए।
अनुशंसित मात्रा में डालें खाद : ठाकुर
केंद्र के सह निदेशक डॉ. दिनेश सिंह ठाकुर ने किसानों से मिट्टी परीक्षण कराने और नौणी विश्वविद्यालय द्वारा सेब के लिए उर्वरकों की दी गई अनुशंसित मात्रा को प्रयोग करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र मशोबरा में मिट्टी के प्रमुख पोषक तत्वों की जांच की पूरी सुविधाएं हैं। केंद्र पर मिट्टी की जांच शुरू कर दी गई है।