अतिरिक्त पार्किंग क्षेत्र मांगने पर ठेका रद्द करना अवैध और मनमाना : हाईकोर्ट
प्रदेश हाईकोर्ट ने उत्तरी रेलवे की ओर से एक पार्किंग ठेकेदार का अनुबंध रद्द करने के आदेश को खारिज कर दिया है। अदालत ने रेलवे की इस कार्रवाई को तर्कहीन और मनमाना बताते देते हुए अवैध करार दिया है। मैसर्स प्रोजेक्ट मेटल्स एंड मशीनरी को शिमला रेलवे स्टेशन के पास 1643.02 वर्ग मीटर क्षेत्र में दोपहिया और चौपहिया वाहनों के लिए पार्किंग चलाने का ठेका अप्रैल 2024 से अप्रैल 2027 तक (तीन साल के लिए) दिया गया था। अनुबंध के दौरान, ठेकेदार ने सुचारु संचालन के लिए अतिरिक्त जगह की मांग की। पहले 76 वर्ग मीटर अतिरिक्त क्षेत्र आवंटित कर दिया था। हालांकि, जब ठेकेदार ने और अधिक जगह के लिए आवेदन किया, तो रेलवे ने इसे आधार बनाकर 15 जुलाई 2025 को पूरे ठेके को समाप्त करने का नोटिस जारी कर दिया।
न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि केवल अतिरिक्त क्षेत्र के लिए आवेदन करना अनुबंध रद्द करने का आधार नहीं हो सकता। रेलवे चाहता तो अतिरिक्त क्षेत्र के आवेदन को अस्वीकार कर सकता था, लेकिन इसके लिए चल रहे अनुबंध को ही खत्म कर देना पूरी तरह से गलत है। कोर्ट ने माना कि यह रेलवे द्वारा अपनी शक्तियों का अनुचित, अवैध और मनमाना इस्तेमाल है। अदालत ने 15 जुलाई 2025 को जारी टर्मिनेशन नोटिस को रद्द करते हुए याचिकाकर्ता को अनुबंध की शर्तों के अनुसार पार्किंग स्थल का संचालन जारी रखने की अनुमति देने के आदेश दिए हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने 180 दिनों की मातृत्व अवकाश को दी मंजूरी
स्वास्थ्य विभाग ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के आदेशों का अनुपालन करते हुए याचिकाकर्ता को तीसरे बच्चे के जन्म पर 180 दिनों के मातृत्व अवकाश को मंजूरी दे दी है। इसे लेकर स्वास्थ्य निदेशक की ओर से हाईकोर्ट में हलफनामा दायर किया गया है। हलफनामे में बताया गया है कि अदालती आदेश की अनुपालना लंबित एसएलपी के अंतिम परिणाम के अधीन होगी। विभाग ने यह कदम याचिकाकर्ता की ओर से दायर अवमानना याचिका के बाद उठाया है। याचिकाकर्ता अर्चना शर्मा ने वर्ष 2025 में अपने मातृत्व अवकाश के अधिकार के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने 30 जुलाई 2025 को उनके पक्ष में निर्णय सुनाया था। लेकिन विभाग ने इसके खिलाफ एलपीए दायर कर दी थी, लेकिन डबल बेंच की खंडपीठ ने एकल जज के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इन्कार कर दिया। इसके बाद सरकार ने कानूनी राय ली। 20 फरवरी 2026 को प्रशासनिक विभाग (स्वास्थ्य) से मिली मंजूरी के बाद, निदेशक स्वास्थ्य सेवाओं ने 5 मार्च 2026 को आधिकारिक आदेश जारी कर दिए।