रूड़ा में करोड़ों से बने बहुचर्चित रामलोक मंदिर पर अब हिमाचल सरकार का अधिकार होगा। तहसीलदार कंडाघाट ने यह फैसला सुनाया है। उन्होंने अपने फैसले में कहा है कि मंदिर का निर्माण राजस्व विभाग की पांच बीघा 6 बिस्वा जमीन पर हुआ है। अतिक्रमण करने पर मंदिर प्रबंधन पर 1.06 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया गया।
सुनवाई के दौरान तहसीलदार ओपी मेहता ने कहा कि राम मंदिर हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में मंदिर तोड़ना तर्कसंगत नहीं होगा। मंदिर को सरकार के अधीन लेकर इसका प्रबंधन जिला प्रशासन को दिया जा सकता है।
करोड़ों की लागत से बने भव्य मंदिर में आदमकद मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा हाल ही में की गई है। मंदिर निर्माण के बाद तुंदल पंचायत प्रधान ने 2017 में तहसीलदार कंडाघाट के पास केस दायर किया था। आरोप था कि मंदिर का निर्माण राजस्व विभाग की जमीन पर किया गया है।
सहायक जिला न्यायवादी कंडाघाट चारू गुप्ता ने इस मामले में आठ गवाह और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए। उसी जगह पर 19 बिस्वा जमीन पंचायती राज विभाग को सामुदायिक भवन बनाने को दी थी।
इस पर भी अवैध कब्जा पाया गया। इस भूमि की स्वीकृति को भी रद्द करने और मलकीयत सरकार के नाम करने की बात कही है। तहसीलदार ओपी मेहता ने बताया कि मंदिर के मुख्य पुजारी से जुर्माने की राशि वसूल करने के लिए मामला अब उपायुक्त कार्यालय को भेजा जाएगा।