बीबीएन में चोर रास्तों से हरियाणा और चंडीगढ़ से तीन से चार सौ पेटियों की सप्लाई होती है। किराना, सब्जी, कन्फेक्शनरी और हेयर कटिंग की दुकानों में भी अवैध शराब बिकती है। अब तो लोगों ने घरों में भी शराब बेचने का धंधा शुरू कर दिया है।
बीबीएन में हिमाचल प्रदेश की शराब से सस्ती होने के कारण बाहरी राज्यों की देसी शराब चोरी-छिपे बिक रही है। बीबीएन में चोर रास्तों से हरियाणा और चंडीगढ़ से तीन से चार सौ पेटियों की सप्लाई होती है। किराना, सब्जी, कन्फेक्शनरी और हेयर कटिंग की दुकानों में भी अवैध शराब बिकती है। अब तो लोगों ने घरों में भी शराब बेचने का धंधा शुरू कर दिया है। महिलाओं को आगे कर शराब बेची जा रही है।
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हिमाचल में पटियाला संतरा और हिमाचल संतरा नाम से देशी शराब बिकती है। इन्हीं नामों से मिलते जुलते नाम माल्टा, नारंगी और संतरा बाहरी राज्यों से अवैध रूप से आती है। यह शराब हिमाचल की शराब से 50 रुपये प्रति बोतल सस्ती है। देसी शराब की बोतल हिमाचल में दो सौ रुपये, आधा एक सौ दस रुपये और क्वार्टर 60 रुपये में मिलता है।
बाहरी राज्यों की शराब 150 रुपये बोतल, आधा 80 रुपये और क्वार्टर 40 रुपये में मिल जाता है। बाहरी राज्यों की शराब खरीदने वाले लोगों का कहना है कि इस शराब को पीने से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। कुछ दिन यह शराब पीने से शरीर में कंपकंपी शुरू हो जाती है। इसे पीने के बाद नशा इतना तेज होता है, जिससे व्यक्ति का अगले दिन सुबह भी सिर चकराता रहता है।
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बद्दी अस्पताल से एसएमओ डॉ. अनिल अरोड़ा ने बताया कि देसी शराब में मिथाइल अलकोहल की निर्धारित मात्रा अधिक हो जाती है तो यह जहर बन जाता है। इसे पीने से मौत हो सकती है। लगातार इस तरह की शराब पीने से व्यक्ति के ब्रेन सेल समाप्त होने शुरू हो जाते हैं। इसका लिवर पर असर पड़ता है।