बैठक में मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना की भी समीक्षा की। इस योजना के तहत वर्तमान में 4,131 बच्चों को लाभ मिल रहा है और इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 30.69 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन बच्चों के लिए नियमित रूप से एक्सपोजर विजिट और मनोरंजक भ्रमण करवाए जाएं। जिन जिलों में अभी तक ऐसे भ्रमण आयोजित नहीं किए गए हैं, उनसे विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के पास इन योजनाओं के लिए धन की कमी नहीं है और हर पात्र व्यक्ति को उसका अधिकार दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि अनाथ बच्चों के कल्याण के लिए विधायक क्षेत्र विकास निधि (एलएडी फंड) का 10 प्रतिशत खर्च करने का प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विधवा, निराश्रित या तलाकशुदा महिलाओं और दिव्यांग अभिभावकों के बच्चों को आर्थिक और शैक्षणिक सहायता देने के लिए इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत प्रदेश में 21,588 लाभार्थी हैं, जिनमें 20,735 बच्चे 18 वर्ष तक की आयु वर्ग के हैं। योजना के लिए 31.01 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी इन कल्याणकारी योजनाओं के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध करवाया जाएगा। बैठक में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री धनीराम शांडिल, अतिरिक्त मुख्य सचिव श्याम भगत नेगी, प्रधान सचिव देवेश कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, आशीष सिंहमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।