छोटा शिमला स्थित हिमाचल प्रदेश सचिवालय में आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह
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पिछले साल बरसात में आई भयंकर आपदा से सबक लेते हुए मानसून सीजन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। गुरुवार को राज्य सचिवालय में मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने समीक्षा बैठक में सभी जिलों के उपायुक्त और सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों से जिला स्तर पर तैयारियों की वर्चुअल माध्यम से जानकारी दी। फैसला हुआ कि शिमला, चंबा, सिरमौर, मंडी और कुल्लू में इस बार एनडीआरएफ की छोटी टुकड़ियां तैनात की जाएंगी। इसके लिए उपायुक्तों को स्थान निर्धारित करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य सचिव ने कहा कि नदी-किनारे रह रहे प्रवासी मजदूरों को अन्य स्थानों पर बसाया जाए। उन्होंने खाद्य आपूर्ति विभाग को भी पर्याप्त खाद्यान्न सामग्री का भंडारण करने के निर्देश दिए। बैठक में बांधों और नदियों में पानी का स्तर मापने की ओर भी ध्यान आकर्षित किया गया। इसके लिए बांध प्राधिकरणों और केंद्रीय जल आयोग को साथ मिलकर समन्वय स्थापित करने और अग्रिम चेतावनी प्रणाली को और सुदृढ़ करने पर बल दिया गया। बांध प्राधिकरणों और केंद्रीय जल आयोग के साथ बैठकें आयोजित की जाएंगी। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि बांध प्राधिकरण अपनी मशीनरी और बाढ़ की स्थिति से निपटने की पूरी तैयारी रखें।
मुख्य सचिव ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि आपदा के दौरान उपयोग की जाने वाली सामग्री जैसे तिरपाल इत्यादि के दाम में बढ़ोतरी न हो। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक सुरेंद्र पाल ने बताया कि प्रदेश में इस वर्ष जून से सितंबर तक मानसून सामान्य रहेगा।
सभी उपमंडलों को सैटेलाइट फोन उपलब्ध करवाने की तैयारीविशेष सचिव आपदा प्रबंधन डीसी राणा ने कहा कि सभी उपमंडलों को सैटेलाइट फोन उपलब्ध करवाने की तैयारी की जा रही है। भारत संचार निगम लिमिटेड जल्द ही सैटेलाइट फोन उपलब्ध करवाने जा रहा है। उन्होंने कहा कि उपायुक्त गत वर्ष कांगड़ा, मंडी, कुल्लू में धंसे स्थलों का दौरा करें और यदि स्थिति चिंताजनक है तो लोगों को दूसरी जगह स्थानांतरित किया जाए। वहीं मानसून सीजन में पहाड़ों की कटाई करने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।