इसमें एचआरटीसी में कंडक्टर के 360 पदों के लिए आवेदन मांगे गए। इस विज्ञापन में आयोग ने एक विशेष नोट जोड़ दिया, जिसके अनुसार सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए प्रदेश के भीतर स्थित स्कूलों से ही मैट्रिक और बारहवीं पास होना अनिवार्य कर दिया गया। ,जबकि मूल हिमाचली निवासियों को इस शर्त से छूट थी। अपीलकर्ता पिंकी ने सामान्य श्रेणी में आवेदन किया और लिखित स्क्रीनिंग परीक्षा भी सफलतापूर्वक पास कर ली। दस्तावेज़ सत्यापन के दौरान आयोग ने उनका आवेदन सिर्फ इसलिए रद्द कर दिया कि उन्होंने अपनी जमा दो की पढ़ाई हरियाणा स्कूल शिक्षा बोर्ड, भिवानी से की और वह मूल रूप से हिमाचल की निवासी नहीं है। इसी आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद पाया कि एचआरटीसी कंडक्टर भर्ती के लिए संशोधित नियम- 2015 प्रभावी हैं, इसमें शैक्षणिक योग्यता केवल किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड या विश्वविद्यालय से बारहवीं पास होना निर्धारित की गई है। नियमों में यह कहीं भी नहीं लिखा कि पढ़ाई केवल हिमाचल प्रदेश के भीतर के स्कूल से ही होनी चाहिए। हालांकि, राज्य सरकार ने वर्ष 2019 में क्लास थ्री और फोर पदों के लिए ऐसी शर्त लगाने संबंधी एक अधिसूचना जारी की थी, लेकिन एचआरटीसी ने इस भर्ती के लिए उस अधिसूचना को आधिकारिक तौर पर नहीं अपनाया। अदालत ने कहा कि आरएंडपी नियमों के विपरीत विज्ञापन में ऐसी पाबंदी लगाना कानूनन गलत है। कोर्ट ने प्रतिवादियों के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि परीक्षा में भाग लेने के बाद उम्मीदवार इस प्रक्रिया को चुनौती नहीं दे सकता।