शिमला। शहर में बने रिहायशी मकानों में दुकानें, ढाबे, दफ्तर, पीजी और कोचिंग सेंटर आदि खोलकर व्यावसायिक गतिविधियां चला रहे भवन मालिकों पर नगर निगम सख्ती कर सकता है। इस मामले पर वीरवार को नगर निगम की मासिक बैठक में चर्चा होगी।
बैठक में पार्षद ऐसे भवन मालिकों पर सख्ती करने और इनसे शुल्क वसूलने को लेकर फैसला ले सकते हैं। नियम अनुसार रिहायशी मकान में व्यावसायिक गतिविधियां चलाने के लिए नगर निगम से अनुमति लेना अनिवार्य है। इसके लिए बाकायदा चेंज आफ लैंड यूज के तहत निगम से मंजूरी लेनी पड़ती है। हालांकि शहर में हजारों भवन मालिक ऐसे हैं जिन्होंने अपने भवनों में दुकानें, ढाबे या दफ्तर खोल रखे हैं। नगर निगम को इसकी सूचना तक नहीं दी है। सदन में लक्कड़ बाजार से रिज तक तैयार हो रही लिफ्ट का काम अचानक बंद होने पर भी हंगामा हो सकता है। भाजपा पार्षद सरोज ठाकुर ने इस पर सवाल लगाए हैं। मासिक बैठक में नगर निगम के वार्षिक बजट को भी मंजूरी दी जाएगी।