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सोलन में शुरू हुआ शूलिनी मेला, पढ़िए पूरा शेड्यूल

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शूलिनी मंदिर से मां की पालकी उठते ही शुक्रवार दोपहर दो बजे तीन दिवसीय राज्य स्तरीय मेले का आगाज होगा। पुरानी कचहरी के पास मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह मां की पालकी का स्वागत करेंगे। इस बार आम लोगों के दर्शनों के लिए मां की पालकी को नए रूप में बनाया गया है।
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इस बार मां की झांकी रास्ते में नहीं रोकने के प्रयास होंगे। आम जनता की सुरक्षा के लिए बाजार में केवल सात झांकियां ही निकाली जाएंगी। वहीं तीन गाड़ियां प्रसाद के वितरण के लिए लगाई गई हैं।

शोभायात्रा के दौरान माता के दर्शनार्थ श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए उचित प्रबंध किए गए हैं। माता की डोली के दर्शनों के लिए काफी भीड़ को देखते हुए माता की डोली को एक स्थान पर खड़ा न रखकर धीरे-धीरे आगे चलाते रहेंगे। इससे पहले दो द्वार में डोली रुकती थी, इसमें एक डीसी चौक तथा दूसरा राजगढ़ रोडो ठोडो ग्राउंड के पास होता था।
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मां के पधारने पर हर भक्त को मिलेगा प्रसाद

आषाड़ मास के इस पावन पर्व पर मां शूलिनी अपनी बड़ी बहन के आतिथ्य पर तीन दिनों के प्रवास पर निकलेंगी। तीन दिनों तक मां गंज बाजार स्थित मंदिर में रहेंगी। इस पावन अवसर पर सम्मलित हो जाता है, संपूर्ण जनपद का अपार जनसमूह। श्रद्धा और हर्षोल्लास का उमड़ता जन सैलाब।

विभिन्न वाद्य यंत्रों की स्वर लहरियों में अहर्निश झूमता, मां शूलिनी की स्तुति में न थकने वाला भारी जनसमूह। शहर के चप्पे-चप्पे में मां के पधारने पर प्रसाद स्वरूप अनेकों स्वादिष्ट व्यंजनों का निशुल्क वितरण।

जो दूर से आए श्रद्धालुओं की प्यास, भूख व थकान को मां के आशीर्वाद के साथ दूर करता है। तीन दिनों में एक अद्भुत श्रद्धा का सैलाब जो समस्त प्राणियों की सुख शांति व मानवता का उत्कृष्ट उदाहरण है।

बदली गई ट्रैफिक व्यवस्‍था

उपायुक्त सोलन मदन चौहान के आदेशानुसार शूलिनी मेले के दौरान शहर में ट्रैफिक व्यवस्था को बदला गया है। आज से उपायुक्त कार्यालय से पुराने बस अड्डे के बीच सुबह आठ बजे से रात 10 बजे तक वाहनों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
शोभायात्रा के वाहनों और इमरजेंसी वाहनों को छूट दी गई है। वहीं शोभायात्रा बाजार से होकर गुजरेगी।

इस दौरान सभी प्रकार के वाहनों का आवागमन बंद रहेगा। राजगढ़ रोड पर डीसी चौक से लेकर मेला स्थल तक वाहनों की पार्किंग करने की अनुमति नहीं है। राजगढ़-ओच्छघाट की ओर से आने वाली बसें तथा भारी वाहन कोटलानाला तक ही आएंगे।

शिमला-चायल-कंडाघाट की ओर से पुराने बस अड्डे तक आने वाली बसें अंबुशा होटल तक आएंगी। इसके आगे वाहनों की आवाजाही नहीं होगी। नियमों का उल्लंघन करने पर पुलिस ने कार्रवाई की बात कही है।
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जानिए शूलिनी मेले का इतिहास

सोलन शहर की अधिष्ठात्री देवी मां शूलिनी है। मार्कंडेय पुराण के अनुसार भगवती का प्रादुर्भाव होने पर, दुष्ट प्रवृत्तियों और राक्षसों का संहार करने के लिए समस्त देवताओं ने अपने-अपने अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए थे। वहीं पिनाकधारी भगवान शंकर ने अपने त्रिशूल से एक शूल निकालकर भगवती को प्रदान किया। त्रिशूल धारिणी दुर्गा ने इसी त्रिशूल से असुरों का संहार किया था। अपने दिव्य प्रभाव के कारण भगवती मां का शूलिनी नाम प्रख्यात हो गया।

जनश्रुति के अनुसार बघाट नरेश ने जब यहां राजधानी स्थापित की थी, उस समय सुयोग्य संतान प्राप्ति, अखंड कीर्ति व सर्व सुख प्राप्ति के हेतु प्रजा की अधिष्ठात्री देवी के रूप में शूलिनी की स्थापना की थी। मेले का इतिहास बघाट रियासत से जुड़ा है। माता शूलिनी बघाट रियासत के शासकों की कुल श्रेष्ठा देवी मानी जाती है।
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