दो बहनों के मिलन के साथ ही श्रद्धा और आस्था का प्रतीक मां शूलिनी मेले का शुभारंभ शुक्रवार को हो गया। दोपहर करीब तीन बजे के बाद शूलिनी मंदिर से भगवती शूलिनी की पालकी शोभायात्रा के रूप में गंज बाजार स्थित अपनी बड़ी बहन मां दुर्गा के घर के लिए निकली। इसी के साथ राज्य स्तरीय मेले का विधिवत शुभारंभ हुआ। परंपराओं को संजोए यह मेला 28 जून तक चलेगा।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अध्यक्षता में मेला शुरू हुआ। रीति अनुसार उन्होंने मां की पालकी को कंधा देकर तीन बार शूलिनी माता का जयघोष किया। इसके बाद शोभा यात्रा का आगाज हुआ। शूलिनी मां का पहला पड़ाव पुराने बस अड्डे पर लगा। यहां बैरिगेट्स लगाए गए थे। हजारों भक्तों ने यहां माथा टेका। इसके बाद मां की पालकी मालरोड से होकर उपायुक्त चौक तक आई।
मां के कल्याणे सफेद कुर्ता पाजामा व काली टोपियों, गले में लाल पटकों के साथ दिखे। चौक बाजार तक कल्याणे और बाद में कारोबारी मां की पालकी के आगे चले। सड़क पर आगे मां के कल्याणे सफाई करते और गंगाजल का छिड़काव करते चल रहे थे। पूरे शहर का चक्कर लगाकर देर रात मां शूलिनी गंज बाजार स्थित अपनी बड़ी बहन के मंदिर में रुकीं। यहां मां शूलिनी तीन दिन तक आतिथ्य के रूप में रहेंगी।
पांच बजे खुले मंदिर के किवाड़
मंदिर में सफाई के बाद पुजारी रामस्वरूप शर्मा ने मां को नए आभूषण व वस्त्र पहनाए। सुबह ठीक 5 बजे मां के मंदिर के किवाड़ भक्तों के लिए खोल दिए गए। भक्तों ने मंदिर में मां की आरती के साथ माथा टेका व सुख शांति की प्रार्थना की। उसके बाद दोपहर तक हवन व पारंपरिक पूजा का आयोजन किया गया।
झांकियों ने बांधा समां
सुसज्जित रथ में मां की मूर्तियों और गणेश, शंकर, काली मां की झांकियां निकाली गईं। इन मूर्तियों को देखने के लिए भक्तों का तांता लग गया। चारों तरफ मां के भजन और मां के जयकारे गूंज रहे थे। रबौण, बाईपास, सपरूण चौक से लेकर पुराने बस स्टैंड और सर्कुलर रोड तक भंडारे ही भंडारे लगे रहे। सुबह से माल रोड पर लोग भंडारों की तैयारी कर रहे थे।