फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Shimla Landslide: समरहिल में बादल फटा है या मानवीय चूक हुई, लोगों ने उठाई जांच की मांग

Thu, 17 Aug 2023 01:57 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

एचपीयू के भूगोल विभाग के पूर्व अध्यक्ष (सेवानिवृत्त) बीएस माढ़ के मुताबिक यदि बारिश के पानी की निकासी की समय रहते उचित व्यवस्था होती तो यह इतनी बड़ी घटना न होती और लोगों की जान न जाती।
विज्ञापन
शिमला में समरहिल में हुई तबाही के बाद एडवांस स्टडी के पास बहा जमीन का हिस्सा। - फोटो : संवाद
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राजधानी शिमला के समरहिल में शिव बावड़ी के पास हुई दर्दनाक घटना में अब तक 13 लोग जान गवां चुके हैं। आठ से दस लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इस घटना में जिस तरह से भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (एडवांस्ड स्टडी) के लॉन से लेकर शिव बावड़ी के नीचे नाले तक सैसैकड़ों पेड़ भूस्खलन की चपेट में आए हैं, उसे बादल फटने की घटना से जोड़कर भी देखा जा रहा है। मौके पर देखें तो जिस तरह से एडवांस स्टडीज से भूस्खलन शुरू हुआ और नीचे तक दो सड़कों, ऐतिहासिक धरोहर शिमला-कालका रेल लाइन के करीब 15 मीटर हिस्से को मलबा बहाकर लेकर गया है, उससे यह घटना आम नहीं है।

विज्ञापन


कुछ लोग इसे बादल फटने की घटना नहीं मान रहे तथा कई सवाल उठा रहे हैं जिसकी गहनता से जांच करवाने की मांग कर रहे हैं। कुछ लोग इसे मानवीय चूक भी बता रहे हैं। एचपीयू के भूगोल विभाग के पूर्व अध्यक्ष (सेवानिवृत्त) बीएस माढ़ के मुताबिक बालूगंज, समरहिल और लोअर समरहिल को जाने वाली सड़क में लगातार बरसात तथा सर्दियों में भूस्खलन होने से सड़क बंद होने की घटनाएं होती रहती हैं।

इसके लिए कहीं न कहीं बारिश के पानी की उचित निकासी का न होना भी एक वजह रही है। भूस्खलन का बार-बार होना बड़ी त्रासदी का संकेत था जिसे लगातार नजर अंदाज किया जाता रहा। यदि बारिश के पानी की निकासी की समय रहते उचित व्यवस्था होती तो यह इतनी बड़ी घटना न होती और लोगों की जान न जाती। बालूगंज से अपर समरहिल और बालूगंज से लोअर समरहिल की ओर जाने वाली सड़क से पानी की निकासी जंगल की ओर होती थी।
विज्ञापन


1989 से लेकर उन्होंने इतनी बड़ी भूस्खलन की घटना क्षेत्र में नहीं देखी। प्रभावित क्षेत्र की भूमि सीपीडब्लूडी, नगर निगम, लोक निर्माण विभाग, रेलवे और वन विभाग की भूमि थी। विभागों ने पानी की उचित निकासी को समय रहते मिलकर कोई योजना नहीं बनाई, जिस कारण यह बड़ा हादसा बन गया।

विज्ञापन

- फोटो : संवाद
बादल फटना हो सकती है भूस्खलन की वजह
1987 से लेकर समरहिल में इस तरह का भूस्खलन आज तक नहीं देखा जिसने पूरे परिवार ही खत्म कर दिए हों। यह सिर्फ भूस्खलन की घटना नहीं है। पानी इतना था कि जिसने एडवांस्ड स्टडीज से लेकर पेड़ों को करीब दो किलोमीटर दूर तक पहुंचा दिया। शिव बावड़ी से बह कर गए शव और शवों के हिस्से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर श्मशानघाट पहुंच गए। यह बादल फटने की घटना में ही संभव है। -प्रो. श्याम लाल कौशल, प्रोफेसर बिजनेस स्कूल एचपीयू

 पहले से धंसती रही है घटना स्थल पर जमीन
जहां भूस्खलन हुआ है, वहां लगातार भूस्खलन होता रहा है, जमीन धंसती रही है। 1980 के आसपास भी यहां एडवांस स्टडीज की सड़क के साथ लगती भूमि पर भूस्खलन हुआ था जिससे कई दिनों तक सड़क बाधित रही थी। इस हादसे के लिए पानी की सुव्यवस्थित निकासी का समय से इंतजाम न किया जाना भी वजह हो सकती है। ऊपरी हिस्से से भूस्खलन होने और अधिक बारिश से दलदल बनी जमीन पूरी तरह से ढह जाने से तबाही हुई है। 50 सालों से समरहिल में रहते हुए उन्होंने भूस्खलन की इतनी बड़ी घटना नहीं देखी। - प्रो. सुरेश कुमार, सेवानिवृत शिक्षक एचपीयू

20 साल पहले भी हुआ था भूस्खलन
78 साल की उम्र में इतना भयानक हादसा कभी नहीं देखा जिसमें दर्जनों लोगों की जान चली गई। घटना स्थल से करीब तीन किलोमीटर दूर तक पेड़ों की छाल उखड़ी हुई थी। बीस साल पहले शिव बावड़ी के पास भूस्खलन हुआ था जिसमें करीब छह से सात पेड़ गिरे थे। मंदिर से करीब दो सौ मीटर दूर वह घर में सुबह की चाय पी रहे थे तो हेलीकॉप्टर जैसी गड़गड़ाहट सुनी फिर कुछ गिरने की तेज आवाज आई। फिर मालूम हुआ कि मंदिर गिर गया। यह जो भी था तबाही थी। - राम स्वरूप, शिव बावड़ी एमआई रूम
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें