पूर्व डिप्टी मेयर राकेश शर्मा के अनुसार शिवमंदिर के पास भी भूस्खलन के कारण कुछ भवनों केा खतरा है। यहां तिरपाल लगा दिए हैं। हालांकि, इन्हें खाली नहीं करवाया है। शहरी विकास विभाग के दफ्तर पर भी खतरनाक पेड़ मंडरा रहे हैं। इनका निरीक्षण भी करवा दिया है। वहीं समरहिल के प्रभावित क्षेत्र में भी करीब आधा दर्जन भवनों में भी दरारें आई हैं।
पार्षद विरेंद्र ठाकुर ने आरोप लगाया कि ड्रेनेज सिस्टम सही नहीं होने के कारण सारा पानी निचले तरफ बसी बस्ती की तरफ आता है। वहीं शहरी विधायक हरीश जनारथा और उप महापौर उमा कौशल ने टुटीकंडी के बंगाली बगीचा जा दौरा किया। यहां भूस्खलन से एक मकान को नुकसान हुआ है।
शिमला के कृष्णानगर में खतरे की जद में आए मकान और सामान निकालकर बांधते हुए लोग।
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भट्ठाकुफर में पेड़ ढहने से दो गाड़ियां दब गईं। पार्षद नरेंद्र ठाकुर के अनुसार वार्ड में बारिश से भारी नुकसान हो गया है। कैथू में शिवमंदिर के पास भी भूस्खलन से सड़क बंद हो गई। फागली में बायपास सड़क पर बड़ी बड़ी दरारें पड़ गई है।
उधर, फागली में बेघर हुए लोगों को संस्कृत कॉलेज में जगह दी गई है। पार्षद सिमी नंदा के अनुसार प्रभावितों को कॉलेज और नाभा क्लब भवन में ठहराया गया है। विकासनगर में सी 15 ब्लॉक के पास भी भूस्खलन से नुकसान हुआ है।