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पहाड़ों की रानी शिमला भी बनेगी स्मार्ट सिटी, मिलेंगे 2730 करोड़

Sat, 24 Jun 2017 04:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली/शिमला
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देश के शहरों को स्मार्ट बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने अगला कदम बढ़ा दिया है। इसके तहत हिमाचल प्रदेश से शिमला, उत्तर प्रदेश से इलाहाबाद, झांसी, अलीगढ़, उत्तराखंड से देहरादून, जम्मू व श्रीनगर और हरियाणा के करनाल समेत 30 शहरों को स्मार्ट सिटी मिशन में शामिल कर लिया गया है। 
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अगले पांच सालों में करीब 57 हजार करोड़ के निवेश से इन शहरों को आधुनिक बनाया जाएगा। स्मार्ट सिटी की तीसरी सूची में शिमला को 15वां स्थान मिला है। शिमला के कायाकल्प के लिए अब 2730.27 करोड़ केंद्र जबकि 500 करोड़ हिमाचल सरकार देगी। धर्मशाला के बाद शिमला सूबे का दूसरा स्मार्ट शहर बनेगा। 

बता दें कि दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में शुक्रवार को स्मार्ट सिटी की तीसरी सूची जारी करते हुए केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने बताया कि दो साल पहले 100 शहरों के लिए स्मार्ट सिटी मिशन लांच किया गया था। इसमें से 90 का चयन हो गया है। बचे दस शहरों की सूची आने वाले समय में जारी की जाएगी। 
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इसके लिए मेरठ, रायबरेली, गाजियाबाद, सहारनपुर, रामपुर समेत 19 शहरों के बीच प्रतिस्पर्धा होगी। इन शहरों को अपना प्लान नए सिरे से बनाना होगा। बेहतर प्रदर्शन वाले 10 शहर मिशन में शामिल होंगे। नायडू ने बताया कि तीसरी सूची में केरल का त्रिवेंद्रम सबसे ऊपर रहा। दूसरे पायदान पर छत्तीसगढ़ का नया रायपुर है, जबकि निचले तीन पायदानों पर उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद, अलीगढ़ और सिक्किम के गंगटोक रहे। 

स्मार्ट सिटी बनने से ये होंगे फायदे

लोअर बाजार, सब्जी मंडी, गंज और कृष्णानगर में खर्च होंगे 1252 करोड़ रुपये
सर्कुलर रोड की रेट्रो फि टिंग व शहर के तीन ट्रांजिट कॉरीडोर पर खर्च होंगे 1280 करोड़
शहर में यातायात प्रबंधन और नागरिक सुरक्षा योजना के लिए 197 करोड़ रुपये  
झुग्गियों में रहने वाले 800 परिवारों को कानूनी पुनर्वास उपलब्ध होगा
ठोस और तरल कचरा प्रबंधन, भवन सुरक्षा, आपदा निवारण के लिए तवज्जो
खुले और मनोरंजक स्थलों का जीर्णोद्धार, पार्किंग सुविधा बढ़ेगी, भीड़ भरे इलाकों से हटेंगी मंडियां
पैदल रास्तों का निर्माण होगा, वार्डों के लिए बनेंगी एंबुलेंस सड़कें और छोटे वाहनों के लिए मार्ग
लोगों को मिलेगा नियमित और स्वच्छ पेयजल, शहर का सीवरेज सिस्टम सुधरेगा

पहले शिमला का नाम भेजा होता तो धर्मशाला न होता स्मार्ट सिटी

छोटा सा राज्य होने के बावजूद हिमाचल केंद्र सरकार से दो स्मार्ट सिटी लेने में कामयाब रहा है। यह पहले से तय था कि केंद्र सरकार ने राजधानी को स्मार्ट सिटी बनाना है। अगर धर्मशाला से पहले शिमला का नाम स्मार्ट सिटी के लिए भेजा होता तो धर्मशाला आज स्मार्ट सिटी न होता।

अब शिमला भी स्मार्ट सिटी में शामिल हो गया है। देश में ऐसे कई छोटे राज्य हैं, जिन्हें एक -एक स्मार्ट सिटी मिली है। अब सूबे के दोनों शहरों के लिए केंद्र सरकार फंडिंग करती रहेगी। जानकारों की मानें तो शिमला को स्मार्ट सिटी बनाने में किसी को श्रेय लेने की जरूरत नहीं है।

यह पहले से तय था कि राज्यों की राजधानी स्मार्ट सिटी में शामिल की जानी है। नगर निगम ने स्मार्ट सिटी का प्रस्ताव तैयार किया। सरकार ने बाकी औपचारिकताएं पूरी कर मामला केंद्र के समक्ष रखा। सरकार ने दो बार शिमला को स्मार्ट सिटी में शामिल होने की पैरवी की।

केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने सरकार को आश्वस्त किया था कि सभी राजधानियों को इसमें शामिल किया जा रहा है। शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा ने कहा कि राज्य हिमाचल दो-दो स्मार्ट सिटी लेने में सफल हुआ है। केंद्र सरकार की फंडिंग से दोनों शहरों का विकास होगा।
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स्मार्ट सिटी का श्रेय लेने के लिए सियासी होड़

राजधानी शिमला को स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल करने को लेकर प्रदेश के सियासी दलों में श्रेय लेने की प्रतिस्पर्धा चल रही है। विधानसभा चुनाव के चलते हर दल जनता के बीच यह साबित करने की कोशिश में हैं कि स्मार्ट सिटी उनकी स्मार्टनेस से घोषित हुई है। भाजपा राज्य सरकार के प्रयासों को खारिज कर इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दे रही है, जबकि कांग्रेस उनके भेजे प्रस्ताव की सफलता करार दे रही है।

उधर, माकपा ने भी स्मार्ट सिटी घोषित करने के पीछे बतौर नगर निगम मेयर और डिप्टी मेयर उनकी कोशिशों की नतीजा करार दिया। शिमला को स्मार्ट सिटी घोषित करने के पीछे नगर निगम शिमला, प्रदेश सरकार और केंद्रीय शहरी विकास विभाग की स्मार्ट सिटी चयन के लिए बनी कमेटी की भूमिका की जगह अब सियासी दलों में श्रेय लेने की प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है। भाजपा के शहर विधायक सुरेश भारद्वाज ने तो नगर निगम की जीत से स्मार्ट सिटी को जोड़ दिया है।

उनकी ओर से जारी बयान में लिखा है कि निगम चुनाव में जीत का उपहार पीएम मोदी ने शहर की जनता को दिया है। प्रथम चरण में शिमला स्मार्ट बन जाता, लेकिन कांग्रेस और नगर निगम पर काबिज साम्यवादियों के अपवित्र गठबंधन ने शिमला को स्मार्ट सिटी बनने से वंचित कर शहर को दो साल पीछे कर दिया।

सांसद अनुराग ठाकुर ने भी प्रदेश सरकार और माकपा पर हमला करते हुए कहा कि केंद्र के सामने सही से आंकड़े नहीं रखे। उधर, सीएम वीरभद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार ने इस बारे 31 मार्च, 2017 को भारत सरकार के शहरी विकास मंत्रालय को प्रस्ताव प्रस्तुत किया था, जिसके अनुरूप शिमला को स्मार्ट सिटी में शामिल किया गया। उन्होंने मामले का राजनीतिकरण किये बिना ही सरकार की कोशिशों से मिली सफलता करार दिया। शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा ने इसके लिए केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय का आभार तक जताया है।
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