प्रशासन की ओर से कुछ वेंडर्स को बेदखली के नोटिस जारी किए गए थे। इसके बाद उन्होंने आजीविका की सुरक्षा को लेकर हाईकोर्ट का रुख किया। याचिका में स्ट्रीट वेंडर्स (आजीविका का संरक्षण और विनियमन) अधिनियम, 2014 और प्रदेश में लागू नियमों का हवाला देते हुए चौधरी अड्डा से पुराने बस स्टैंड तक के क्षेत्र को वेंडिंग जोन या प्राकृतिक बाजार घोषित करने की मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को एक सप्ताह के भीतर नगर परिषद को नया और विस्तृत प्रतिवेदन देने को कहा है। नगर परिषद को प्रतिवेदन मिलने के तीन सप्ताह के भीतर उस पर निर्णय लेना होगा। निर्णय से पहले लोक निर्माण विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग उपमंडल रामपुर समेत सभी संबंधित विभागों से उचित परामर्श लेना होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रतिवेदन पर अंतिम निर्णय होने तक याचिकाकर्ता को उसके स्थान से हटाने या उसके खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।