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शिमला रेप केस: इस शख्स की बात मान ली होती तो नहीं फंसते बड़े पुलिस अफसर

Mon, 27 Nov 2017 01:31 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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कोटखाई थाने के तत्कालीन संतरी की बात मान ली होती तो आईजी जहूर एच जैदी और एसपी डीडब्ल्यू नेगी समेत पुलिस एसआईटी के अन्य अधिकारी और कर्मचारी नहीं फंसते।
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सूरज सिंह हत्याकांड में ठियोग के तत्कालीन डीएसपी मनोज जोशी, कोटखाई के पूर्व थाना प्रभारी राजेंद्र सिंह, एएसआई दीप चंद और अन्य पुलिस वालों को बचाने का आईजी जहूर एच जैदी का दांव उल्टा पड़ गया। वे खुद ही फंस गए।

अब गुड़िया दुराचार और कत्ल मामले से संबंधित पुलिस हिरासत में हुए सूरज के कत्ल को साबित करने के लिए सीबीआई कई तरह के वैज्ञानिक सबूतों के होने का दावा कर रही है।
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संतरी दिनेश शर्मा के बयान के अलावा सीबीआई के पास कई इलेक्ट्रानिक सबूत भी हैं, जिसकी बुनियाद पर इस मामले की चार्जशीट को तैयार किया गया है। सीबीआई की तरफ से सीजेएम कोर्ट शिमला में सूरज हत्याकांड की चार्जशीट पेश कर दी गई है।

इसमें आईजी जहूर एच जैदी, डीएसपी मनोज जोशी, थाना प्रभारी राजेंद्र सिंह, एएसआई दीप चंद और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ सूरज सिंह की हत्या करने, आपराधिक षड्यंत्र रचने, प्रताड़ना करने समेत कई अन्य आरोपों में मुकदमा चलेगा।

यहां से मिल गया सुराग

सीबीआई के सूत्रों की मानें तो आईजी जहूर एच जैदी ने संतरी की आवाज को अपने मोबाइल में रिकॉर्ड किया। जैदी जब हत्या हो जाने के दूसरे दिन कोटखाई थाने में गए तो उन्होंने संतरी दिनेश शर्मा से बातचीत की। ये बातचीत जैदी ने अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड की।

बाद में सीबीआई ने जब संतरी दिनेश शर्मा से बात की तो इससे ये सुराग मिल गया। सीबीआई ने जैदी का फोन अपने कब्जे में लिया। इस फोन से डाटा रिट्रीव करवाया गया तो उसमें ये रिकॉर्डिंग मिली है।

इससे ये बात साबित करने को सीबीआई को एक आधार भी मिल गया है कि जब आईजी को संतरी से ये सूचना मिल चुकी थी कि राजू ने सूरज की हत्या नहीं की तो उन्होंने केस इसके उलट दर्ज क्यों करवाया।

अन्य पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के फोन भी कब्जे में लिए गए। इनसे भी तमाम तरह की रिकॉर्डिंग, व्हाट्सएप और अन्य तरह के तमाम संदेशों को सीबीआई ने गंभीरता से खंगाला है। 

अफसरों को इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स इस्तेमाल करने नहीं आए

पुलिस अधिकारियों को इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स इस्तेमाल करने नहीं आए। सीबीआई के पास इलेक्ट्रॉनिक सबूत हैं। इनमें पुलिस अधिकारियों के मोबाइल फोन में रिकॉर्ड ऑडियो, वीडियो, मैसेज आदि हैं।

सीबीआई के पास अधिकारियों की कॉल डिटेल भी है। इसमें तमाम लोगों से की गई बात का रिकॉर्डिंग है। इन सबके आधार पर ही सीबीआई ऐसे कई सबूतों को जुटाने में कामयाब हुई है, जिनसे इस मामले की बुनियाद तैयार की गई है।

संतरी से जबरन लिखाया गया ये बयान

सीबीआई का आरोप है कि संतरी दिनेश शर्मा से ये बयान जबरन लिखाया गया कि वह जब 18 जुलाई की रात को 9 से 12 बजे तक संतरी ड्यूटी पर था तो आरोपी सूरज से ऊपरी मंजिल में करीब 11:25 बजे तक पूछताछ चल रही थी।

करीब पौने 12 बजे राजू और सूरज आपस में खुसर-पुसर करने लगे। अचानक राजू ने आरोपी सूरज को मारना शुरू कर दिया। इस पर संतरी ने जोर से आवाज देकर उनको रोकना चाहा, मगर वे रुके नहीं। संतरी हवालात में लॉकअप की चाबी लेने गया।

उस वक्त राजेंद्र उर्फ राजू लात-मुक्कों से सूरज को पीट रहा था। उसे नीचे फर्श पर लिटा दिया था। उसके मुंह के दाहिने तरफ और दाईं भौंह पर भी चोट की गई। उसके बाद उसे अस्पताल ले गए, जहां वह मृत घोषित किया गया।

राजू के साथ संतरी को लपेटकर छुटकारा चाह रहे थे पुलिस अफसर

सीबीआई सूत्रों के अनुसार पूछताछ के दौरान सूरज को कोटखाई थाने की ऊपरी मंजिल मेें मारा गया। उसे डंडे और बेल्ट से पीट-पीटकर मारा गया। दूसरा आरोपी सुभाष भी उस वक्त पूछताछ में शामिल था। तत्कालीन डीएसपी मनोज जोशी और एसएचओ राजेंद्र सिंह के अलावा अन्य पुलिस वाले भी थाने में ही थे।

जब ये हत्या हो गई तो डीएसपी मनोज जोशी ने आरोपी राजू पर हत्या का आरोप मढ़कर अकेले संतरी दिनेश शर्मा को लपेटकर ही इस मामले से छुटकारा पाना चाहा।

बयान देने के बाद संतरी दिनेश शर्मा पुलिस अफसरों के बुने जाल को भांप गया और उसने सीबीआई के सामने बयान बदल दिया कि राजू ने सूरज को नहीं मारा। उसके सामने थाना प्रभारी सूरज को कहीं ले गया। लॉकअप में वह अकेले राजू की ही रखवाली कर रहा था।
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कोकूनाला से बानकूफर तक सीबीआई का डेरा

सूरज हत्या मामले में चार्जशीट पेश करने के बाद सीबीआई टीम गुड़िया दुराचार और हत्या मामले की जांच को आगे बढ़ा रही है। शनिवार से लेकर सीबीआई टीम कोकूनाला से लेकर वानकूफर तक मामले की जांच में जुटी रही। सीबीआई की दो सदस्यीय टीम ने वानकूफर में लोगों से पूछताछ की, जबकि दूसरी टीम के सदस्य कोकूनाला से महासू तक आने जाने वाले लोगों घटनाक्रम की जानकारी जुटाते रहे।

महासू जाने के लिए तीन रास्ते हैं। इनमें कोकूनाला से महासू, खुली से महासू और वाया बखोल मार्ग हैं। तीनों रास्तों पर सीबीआई ने डेरा डाला है। आने जाने वाले लोगों से सीबीआई गुड़िया मामले में सुराग ढूंढ रही है। महासू जाने वाली गाड़ियों पर टीम नजर रखे है।

गाड़ियों को रोक कर चालकों और पूछा जा रहा है - कहां के रहने वाले हो, गुड़िया किस-किस से मिलती थी, इस रास्ते से गुड़िया का आना-जाना लगा रहता था... आदि सवाल किए जा रहे हैं। सीबीआई की चार गाड़ियां शनिवार को वानकूफर पहुंची थीं। दो टीम के सदस्य वानकूफर फॉरेस्ट हाउस में रुके थे। अन्य टीम के सदस्य रात को रेस्ट हाउस नहीं पहुंचे।
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