जिला शिमला की घूंड की ठकुराई के शासकों के वारिस राणा सितेंद्र चंद का रविवार सुबह करीब 8:00 बजे देहांत हो गया। उनका देहांत ह्रदय गति रुकने के कारण हुआ। सुबह के समय उनके सीने में दर्द उठा तो परिजन उन्हें सिविल अस्पताल ठियोग ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया। ठकुराई छोटी रियासतों को कहा जाता था।
बीते वर्ष छह मई को घूंड की ठकुराई के राणा सितेंद्र चंद का राज तिलक हुआ था, जिसमें क्षेत्र के हजारों लोगों ने शिरकत की थी। अभी एक साल भी पूरा नहीं हुआ कि अचानक से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। सितेंद्र के पिता के निधन के बाद उनका राजतिलक नहीं हो पाया था।
देवता शिरगुल महाराज के भंडारी धनी राम झांगटा ने बताया कि पूरे क्षेत्र में आज से 11 दिनों तक शोक मनाया जाएगा। शिला घूंड और पराई घूंड के लोगों के लिए यह बड़ी क्षति है। उन्होंने बताया कि संपूर्ण घूंड ठकुराई में राजकीय शोक रहेगा, जिसमें दैविक कार्य से लेकर कोई भी जश्न नहीं होगा।
आज से ही दैविक नगाड़ों को उल्टा कर दिया गया है। वहीं, घूंड पंचायत के उपप्रधान चेत राम चंदेल ने बताया कि पूरा क्षेत्र शोक में डूब गया है। वहीं, राज परिवार की प्रथा को निभाते हुए अब राजगद्दी पर विधि विधान से अनिरुद्ध चंद विराजमान होंगे। पिता के देहांत के बाद ही क्रियाकर्म की विधि से पहले पूजन के साथ राज तिलक किया गया।
अब घूंड रियासत के 16वें सांकेतिक शासक राणा अनिरुद्ध चंद होंगे। वहीं, अंतिम विदाई में 15 से अधिक कुशल कारीगरों द्वारा अंतिम यात्रा का विशेष वाहन बनाया गया, जिसे स्थानीय भाषा में फड़की कहा जाता है। करीब पांच घंटों की मेहनत के बाद इसे बनाया जाता है।
अंतिम विदाई में हजारों की संख्या में लोगों का हुजूम उमड़ा। वैसे तो देश में लोकतंत्र है और राजा-राणाओं का राज अंग्रेजों के साथ ही समाप्त हो गया था, लेकिन देवभूमि में आज भी लोगों की खासी आस्था देवताओं, राजाओं-राणाओं में बनी हुई है, जिसका जीता-जागता प्रमाण घूंड में देखने को मिला।