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दुखद: चला गया दिलों का भी राजा, वीरभद्र छह बार मुख्यमंत्री और पांच बार रहे सांसद

Thu, 08 Jul 2021 04:28 PM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला

सार

 शिमला जिले की रामपुर तहसील के सराहन में जन्मे 87 वर्षीय वीरभद्र सिंह 70 दिनों से आईजीएमसी में दाखिल थे। बीते सोमवार को अचानक तबीयत खराब होने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें सीसीयू में वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया था। 
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पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश की राजनीति के वीरभद्र विदा हो गए। देवभूमि में करिश्माई, बेहद लोकप्रिय नेता और छह बार मुख्यमंत्री, पांच बार सांसद रहे वीरभद्र सिंह ने गुरुवार तड़के 3:40 बजे इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) शिमला में अंतिम सांस ली।  उनके निधन की पुष्टि के बाद प्रदेश सरकार ने एक दिन का अवकाश और तीन दिन का राजकीय शोक घोषित कर दिया। राष्ट्रीय ध्वज के साथ ही कांग्रेस पार्टी का झंडा आधा झुका दिया गया। उनका पार्थिव शरीर उनके आवास हॉलीलॉज लाया गया। शुक्रवार को वीरभद्र सिंह की पार्थिव देह शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान में सुबह 9:00 से 11:30 बजे तक आम लोगों के दर्शन के लिए रखी जाएगी।

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11:40 से 1:00 बजे तक पार्टी मुख्यालय राजीव भवन में कार्यकर्ता अपने नेता को श्रद्धांजलि देंगे। इसके बाद सड़क मार्ग से पार्थिव देह को उनके पैतृक घर पद्म पैलेस रामपुर ले जाया जाएगा। शनिवार सुबह 8:00 से 2:00 बजे तक पद्म पैलेस में स्थानीय लोग उनके अंतिम दर्शन करेंगे। दोपहर 3:00 बजे रामपुर में सतलुज नदी के किनारे पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि होगी। 23 जून, 1934 को शिमला जिले की रामपुर तहसील के सराहन में जन्मे 87 वर्षीय वीरभद्र सिंह 70 दिनों से आईजीएमसी में दाखिल थे।

बीते सोमवार को अचानक तबीयत खराब होने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें सीसीयू में वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया था। तब से वह बेहोशी की हालत में उपचाराधीन थे। इससे पहले वीरभद्र सिंह दो बार कोरोना संक्रमित हुए। दोनों बार कोरोना को तो वह मात दे चुके थे लेकिन, अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। चिकित्सकों के अनुसार उन्हें कार्डियक पल्मोनरी अरेस्ट भी पड़ा था। सीवेयर निमोनिया भी हुआ था।
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उनका डायलिसिस चल रहा था। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में वीरभद्र सिंह सोलन जिला के अर्की विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक थे। वीरभद्र सिंह परंपरागत सीट रोहडू से विधानसभा चुनाव लड़ते थे। अपने घर रामपुर की सीट के आरक्षित होने के कारण वह कभी भी यहां से चुनाव नहीं लड़ पाए। पुनर्सीमांकन के चलते रोहडू़ सीट भी आरक्षित हुई तो 2012 में उन्होंने शिमला ग्रामीण सीट से चुनाव लड़ा। 2017 में उन्होंने यह सीट अपने बेटे विक्रमादित्य सिंह के लिए सीट छोड़ दी और उन्होंने खुद अर्की से चुनाव लड़ा। 

इमबालमिंग प्रक्रिया से सुरक्षित रहेगी देह
पूर्व सीएम के निधन के बाद उनकी पार्थिव देह को इमबालमिंग प्रक्रिया से कुछ दिन सुरक्षित रखा जाएगा। यह प्रक्रिया वीरवार को आईजीएमसी के एनोटॉमी विभाग में पूरी की गई। सुबह करीब साढ़े पांच बजे देह को मेडिकल कॉलेज के एनोटॉमी विभाग में लाया गया। जहां पर इस प्रक्रिया को पूरा किया गया। इस प्रक्रिया के जरिये मृत्यु के बाद शरीर में होने वाले परिवर्तन देरी से आते हैं। दिवंगत वीरभद्र सिंह के पार्थिव शरीर का शनिवार को दाह संस्कार होना है, इसलिए ये प्रक्रिया अपनाई गई है।

पीएम मोदी ने निधन पर शोक जताया



प्रियंका गांधी ने दी श्रद्धांजलि
वीरभद्र सिंह की मृत्यु के बाद प्रियंका गांधी ने शोक व्यक्त करते हुए लिखा कि राजनीति में विशालकाय पर्वतों सा कद रखने वाले व देवभूमि हिमाचल को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री और  कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वीरभद्र सिंह के निधन से हम सबको एक अपूर्णीय क्षति हुई है। ईश्वर उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दें। विनम्र श्रद्धांजलि।


कांग्रेस के प्रभारी राजीव शुक्ला और सह प्रभारी संजय दत्त पूर्व मुख्यमंत्री वीरभ्रद सिंह के निधन पर शोक जताने के लिए होलीलॉज पहुंचे। प्रभारी शुक्ला ने कहा कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का एक प्रतिनिधिमंडल भी शोक जताने के लिए शिमला पहुंच रहा है। 

वहीं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के निधन पर शोक जताते हुए कहा कि वे छह बार सीएम रहे और उनके निधन से पार्टी को क्षति हुई है। सोनिया गांधी ने पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी एवं पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह को एक पत्र भेजकर दिवंगत आत्मा के प्रति शोक जताया।  

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप राठौर, नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री, पूर्व कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंदर सुक्खू ने भी पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के निधन पर शोक जताया है। इन नेताओं ने कहा कि वीरभद्र सिंह के निधन से पार्टी को नुकसान हुआ है। जिसकी कभी भरपाई नहीं हो सकती। 

नड्डा, जयराम और कश्यप ने जताया शोक
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं संसद सुरेश कश्यप, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, प्रभारी अविनाश राय खन्ना, सह प्रभारी संजय टंडन, संगठन महामंत्री पवन राणा, महामंत्री त्रिलोक जम्वाल, राकेश जम्वाल एवं त्रिलोक कपूर ने पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है। नेताओं ने शोक संदेश में वीरभद्र सिंह की मृत्यु पर गहरा दुख एवं शोक प्रकट किया है।

वीरभद्र सिंह छह बार हिमाचल के मुख्यमंत्री रहे। वीरभद्र सिंह यूपीए सरकार में भी केंद्रीय कैबिनेट मंत्री रहे थे।उनके पास केंद्रीय इस्पात मंत्रालय रहा। इसके अलावा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग मंत्रालय भी रहा। वीरभद्र सिंह का जन्म 23 जून, 1934 को बुशहर रियासत के राजा पदम सिंह के घर में हुआ। 

राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिवार को इस असहनीय दुःख को सहन करने के लिए शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है।

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वीरभद्र सिंह 1983 से 1985 पहली बार, फिर 1985 से 1990 तक दूसरी बार, 1993 से 1998 में तीसरी बार, 1998 में कुछ दिन चौथी बार, फिर 2003 से 2007 पांचवीं बार और 2012 से 2017 छठी बार मुख्यमंत्री बने। लोकसभा के लिए वह पहली बार 1962 में चुने गए। 

उन्होंने पहली बार महासू लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। लोकसभा के लिए वीरभद्र सिंह 1962, 1967, 1971, 1980 और 2009 में चुने गए।वर्तमान में वीरभद्र सिंह अर्की से विधायक थे।  इंदिरा गांधी की सरकार में वीरभद्र सिंह दिसंबर 1976 से 1977 तक केंद्रीय पर्यटन एवं  नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री रहे। दूसरी बार भी वह इंदिरा सरकार में ही वर्ष 1982 से 1983 तक केंद्रीय उद्योग राज्यमंत्री रहे।

इसके बाद उन्होंने हिमाचल प्रदेश में तत्कालीन मुख्यमंत्री ठाकुर राम लाल की जगह मुख्यमंत्री की कमान संभाली। उसके बाद से राज्य की राजनीति में सक्रिय हुए। फिर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व की केंद्र की यूपीए सरकार में वीरभद्र सिंह 28 मई 2009 से लेकर 18 जनवरी 2011 तक कैबिनेट मंत्री रहे।

वीरभद्र सिंह परंपरागत सीट रोहड़ू से विधानसभा चुनाव लड़ते थे। अपने घर रामपुर की सीट के अनारक्षित होने के कारण वह कभी भी यहां से चुनाव नहीं लड़ पाए। पुनर्सीमांकन के चलते रोहड़ू सीट भी आरक्षित हुई तो 2012 में उन्होंने शिमला ग्रामीण सीट से चुनाव लड़ा। 2017 में उन्होंने यह सीट बेटे विक्रमादित्य सिंह के लिए  छोड़ दी और खुद अर्की से चुनाव लड़े।

हिमाचल प्रदेश के पूर्व सीएम और कांग्रेस नेता वीरभद्र सिंह के पार्थिव शरीर को चिकित्सा प्रक्रिया के लिए मेडिकल कॉलेज ले जाया गया है। बाद में उनके पार्थिव शरीर को शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल से उनके आवास पर ले जाया जाएगा।
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