समरहिल के शिव बावड़ी मंदिर के पास मलबे से शव निकालकर ले जाते सर्च अभियान में जुटे एनडीआरएफ के जवान।
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जेसीबी और पोकलेन मशीन से नाले में बड़े पत्थरों को हटाया गया और इसके बाद एनडीआरएफ की टीम ने खुदाई करके शवों को बाहर निकाला। तहसीलदार (शहरी) एचएल गेज्टा ने बताया कि सभी लापता लोगों के शव मिल गए हैं। बचाव कार्य में स्थानीय पार्षद वीरेंद्र ठाकुर भी हर रोज मौके पर मौजूद रहते थे। एसपी संजीव गांधी ने बताया कि पुलिस के पास मलबे में दबे 20 लोगों की रिपोर्ट थी।
14 अगस्त की सुबह करीब 7:15 बजे भूस्खलन के बाद आए मलबे की चपेट में आने से शिव बावड़ी मंदिर ध्वस्त हो गया था। भूस्खलन इतना खौफनाक था कि मंदिर का नामोनिशान मिट गया। मंदिर पूरी तरह से मलबे में दब गया था। मंदिर में माथा टेकने आए लोगों को बचने का समय तक नहीं मिला।
14 अगस्त को समरहिल के शिव बावड़ी मंदिर में हुई त्रासदी के बाद परिजन अपनो के मिलने की तलाश में सुबह से रात तक घटनास्थल पर इंतजार में रहते थे। दिनभर लोग नाले की तरफ मलबे में नजर टिकाए रहते। शव मिलने पर हूटर बजता था तो अपनों के मिलने की आस बढ़ जाती थी। लेकिन अब सभी लापता शव मिल चुके हैं, ऐसे में अब लोगों का इंतजार भी खत्म हो गया है।
नीरज के शव को देखकर बेटी, मां और पत्नी की आंखों से आंसू छलक गए। नीरज का वीरवार को ही अंतिम संस्कार कर दिया गया। 13 साल की सानवी ने पिता की अर्थी को कंधा दिया। इसके बाद बड़े भाई नरेश ठाकुर ने उन्हें मुखअग्नि दी। ताया जगदीश ने बताया कि नीरज बहुत ही मेहनती था और हमेशा सबकी मदद करने के लिए तत्पर रहता था।
शिव बावड़ी मंदिर हादसे में एक परिवार की तीन पीड़ियां खत्म हो गईं। इसमें पवन, पत्नी संतोष, बेटा अमन, बहू अर्चना और पोतियां समायरा, नाइरा और साशा शामिल हैं। अब परिवार में पवन की बेटी निकिता बची हैं जो लुधियाना में अपने पति के साथ रहती है।
शिव बावड़ी मंदिर का इतिहास करीब 200 साल पुराना है। स्थानीय लोगों के मुताबिक इसका निर्माण गोरखा शासकों के समय में हुआ था। बावड़ी शिव के लिए समर्पित थी। इसमें नियमित रूप से साधु आते रहते थे। बाद में मंदिर परिसर में बनी बावड़ी हिंदुओं के लिए तीर्थ स्थल बना गया। वर्तमान में मंदिर में पूजा अर्चना का कार्य गढ़वाल के तीन पुजारी करते थे। मंदिर की एक अलग कमेटी भी बनी है। मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां निसंतान दंपती पूजा अर्चना करें तो संतान प्राप्ति होती है। बावड़ी के पानी में स्नान करने से चर्म रोग भी दूर हो जाते हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार घटना के दिन 14 अगस्त को मंदिर में भंडारा था। लोगों को खीर परोसी जानी थी। इसकी तैयारियों को लेकर कुछ लोग बीती रात ही मंदिर पहुंच गए थे। सावन का साेमवार होने के कारण सुबह 6:30 बजे से पूजा अर्चना के लिए मंदिर में लोगों की आवाजाही शुरू हो गई। लेकिन सुबह 7:15 बजे समरहिल का शिव बावड़ी मंदिर पहाड़ी से हुए भूस्खलन के चलते मलबे में दफन हो गया।
जिला शिमला में 22 जून से लेकर अब तक भूस्खलन एवं प्राकृतिक आपदा के कारण करीब 58 लोग अपनी जान गवां चुके हैं। 60 के करीब लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा 4 लोग लापता चल रहे हैं। वहीं सर्च अभियान में सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, बीआरओ, होमगार्ड, अग्निशमन के 250 जवान डटे थे। इसमें स्थानीय लोगों और स्वयंसेवियों ने भी सहयोग किया।