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शिमला-कैथलीघाट फोरलेन निर्माण की डीपीआर बनने का कार्य 80 फीसदी पूरा

Mon, 14 Jun 2021 12:50 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, शिमला

सार

एनएचएआई के प्रोजेक्ट मैनेजर अशोक रोहलानिया ने बताया कि जुलाई आखिर तक डीपीआर बनाने का कार्य पूरा होगा। उल्लेखनीय है कि अक्तूबर 2019 से कालका-शिमला फोरलेन के इस ड्रीम प्रोजेक्ट के तीसरे चरण में कैथलीघाट से ढली तक बनने वाले 27 किलोमीटर के हिस्से का निर्माण कार्य ठप पड़ा है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कालका-शिमला फोरलेन के कैथलीघाट से ढली तक बनने वाले फोरलेन की नई सिरे से डीपीआर बनाने का कार्य युद्धस्तर पर शुरू हो गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) का दावा है कि डीपीआर बनाने का कार्य 80 फीसदी पूरा हो गया है। जुलाई आखिर तक इसे पूरा किया जाएगा। बीते हफ्ते केंद्रीय भूतल मंत्री नितिन गडकरी ने भी फोरलेन निर्माण कार्य को शीघ्र शुरू करने आश्वासन सीएम जयराम ठाकुर को दिया था। ऐसे में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एचएनएआई) के इंजीनियर फोरलेन निर्माण के लिए डीपीआर बनाने के कार्य में जुट गए हैं। 

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एनएचएआई के प्रोजेक्ट मैनेजर अशोक रोहलानिया ने बताया कि जुलाई आखिर तक डीपीआर बनाने का कार्य पूरा होगा। उल्लेखनीय है कि अक्तूबर 2019 से कालका-शिमला फोरलेन के इस ड्रीम प्रोजेक्ट के तीसरे चरण में कैथलीघाट से ढली तक बनने वाले 27 किलोमीटर के हिस्से का निर्माण कार्य ठप पड़ा है। फोरलेन निर्माण में लगी कंपनी पॉलिसी में चेंज ऑफ स्कोप (सीओएस) अप्रूव न होने का तर्क देकर निर्माण कार्य अधूरा छोड़कर चली गई थी। इसके बाद फोरलेन निर्माण का कार्य ठप है। कंपनी जिस वक्त फोरलेन निर्माण कार्य छोड़कर गई, इस दौरान फोरलेन के लिए सभी अपरोच सड़क तैयार हो चुकी थी। फोरलेन के लिए जमीन अधिकृत का कार्य भी लगभग पूरा हो गया है।

एसओएस की मंजूरी न होने के बाद कंपनी ने अधूरा छोड़ा कार्य
कैथलीघाट से ढली तक हिस्से का निर्माण कार्य 2018 में शुरू किया था। पॉलिसी के तहत कंपनी को जब काम अवार्ड किया गया तो जमीन की कटिंग फोरलेन की होनी थी, जबकि निर्माण इसका टू लेन में होना था। जनवरी 2019 में इसे चेंज ऑफ स्कोप बनाया गया। इसके तहत प्रोजेक्ट अब टू लेन की जगह फोरलेन बनना था। इससे प्रोजेक्ट की अनुमानित राशि 1480 करोड़ से बढ़कर 2100 करोड़ हो गई। इसके चलते एनएचएआई पीयू शिमला ने सीओएस बनाकर अप्रूवल के लिए इसे दिल्ली हेड क्वार्टर भेजा, लेकिन अप्रूवल न होने पर कंपनी ने काम बंद कर दिया।

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