नंडला से ब्याह कर धारा गांव लाई पूनम की बदनसीबी तो देखो। अंतिम समय में पूनम की अर्थी को मायके वालों का कंधा भी नसीब नहीं हुआ। हादसे के बाद पूनम के मायके में एक छोटा भाई ही बचा है। छोटे भाई मुकेश ने अपने माता, पिता और भाई की चिता को तो अग्नि दी, लेकिन अपनी बड़ी बहन की अर्थी को कंधा नहीं दे सका।
परिवार की इस तबाही के मंजर को देखकर क्षेत्र में हर एक व्यक्ति की आंखें नम थीं। सड़क हादसे में मारे गए धारा गांव के पांच लोगों की चिताएं रविवार को एक साथ जलाई र्गईं। प्रेम सिंह, पत्नी पूनम और उनकी छह साल की बेटी रिधिमा का एक अंतिम संस्कार हुआ। वहीं चाची बंदी देवी और चचेरे भाई नेहर सिंह की चिताएं भी साथ ही जलाई गईं।