शिक्षकों की मांगें पूरा करने के लिए गठित हाई पावर कमेटी की बैठक गुरुवार को मुख्य सचिव राम सुभग सिंह की व्यस्तता के चलते टल गई। दोपहर 12 बजे प्रस्तावित बैठक को पहले साढ़े 12 बजे के लिए तय किया गया, फिर बैठक को टाल दिया गया।
शिक्षकों की मांगें पूरा करने के लिए गठित हाई पावर कमेटी की बैठक गुरुवार को मुख्य सचिव राम सुभग सिंह की व्यस्तता के चलते टल गई। दोपहर 12 बजे प्रस्तावित बैठक को पहले साढ़े 12 बजे के लिए तय किया गया, फिर बैठक को टाल दिया गया। बैठक की आगामी तारीख तय नहीं हुई है। हाई पावर कमेटी की बैठक न होने से शिक्षक संगठनों में भारी रोष है। गुरुवार को प्रस्तावित हाई पावर कमेटी की बैठक में 2555 एसएमसी शिक्षकों के लिए नीति बनाने का फैसला होने की संभावना थी। ये शिक्षक कई वर्षों से दूरदराज के क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं। धूमल सरकार ने इन्हें नियुक्तियां दी थीं। बीते दिनों पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल ने सरकार को पत्र लिखकर इन शिक्षकों के हितों की रक्षा करने का आग्रह किया है।
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हाई पावर कमेटी की बैठक में इस मामले पर बड़ा फैसला होने की उम्मीद थी। भाषा शिक्षकों और शास्त्री को टीजीटी पदनाम देने का फैसला भी होने की उम्मीद थी। शिक्षकों के विभिन्न वर्गों के भर्ती एवं पदोन्नति नियमों की विसंगतियों पर भी चर्चा होनी थी। बैठक के लिए शिक्षक महासंघ के पदाधिकारी गुरुवार सुबह ही सचिवालय पहुंच गए थे। हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान भी सचिवालय के आसपास घूमते दिखे। कई अन्य शिक्षकों संगठनों के पदाधिकारी भी पहुंचे थे। मुख्य सचिव की बॉर्डर सिक्योरिटी को लेकर बैठक लंबी चलने से हाई पावर कमेटी की बैठक टाल दी गई। एसएमसी शिक्षक संघ के अध्यक्ष मनोज रौंगटा ने सरकार से कई वर्षों से सेवाएं दे रहे एसएमसी शिक्षकों के हित में फैसला लेने की गुहार लगाई है।