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अब शिमला में भी पैदा होगा अमेरिका का आलू

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शिमला में जल्द ही अमेरिकी आलू पैदा किया जाएगा। केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई) शिमला ने हिमाचल प्रदेश के ज्योति आलू में अमेरिका के वाइल्ड साइलेंट जीन को मिलाकर आलू की एक नई हाईब्रिड तैयार की है।
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इसे ट्रायल करने के लिए हिमाचल सरकार ने अनुमति दे दी है। लेकिन केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से अभी ट्रायल की स्वीकृति का इंतजार है।

यह प्रयोग अगर सफल रहा तो यह प्रदेश के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी। साथ ही इस प्रयोग को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार सहित देश के दूसरे राज्यों के लिए भी किया जा सकता है।

देश में बढ़ सकता है उत्पादन

देश में आलू को झुलसा बीमारी से भारी नुकसान हो रहा है। इसे ध्यान में रखकर सीपीआरआई की ओर से आलू में प्रतिरोधक क्षमता और उत्पादन को बढ़ाने के लिए हाईब्रिड तैयार किया गया है।

इससे हिमाचल सहित पूरे देश के किसानों को इसका लाभ मिल सकेगा। हालांकि अभी तक जमीनी स्तर पर इसको लेकर कोई प्रयोग नहीं हो पाया है। केवल प्रदेश सरकार की ओर से ट्रायल की अनुमति मिली है, लेकिन इससे पहले केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी भी अनिवार्य है।

इसको लेकर लगभग एक माह पहले संस्थान की ओर से आवेदन किया गया है। आवेदन पर ग्रीन सिग्नल मिलने के बाद ही संस्थान की ओर से आगे कोई कदम उठाया जा सकता है।

अन्य देशों ने भी लिया है जीन

अमेरिका की ओर से जो वाइल्ड जीन तैयार किया गया है। उस जीन को भारत के सीपीआरआई सहित विश्व के कई देशों ने लिया है लेकिन अभी तक इसको लेकर जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं हो पाया है।

हालांकि, सीपीआरआई की ओर से जीन प्राप्त करने के बाद अनुसंधान का काम तो पूरा हो चुका है। केवल ट्रायल किया जाना शेष है।

सीपीआरआई निदेशक डॉ. बीर पाल सिंह का कहना है कि अमेरिका से लगभग दो साल पहले जीन प्राप्त किया गया था। इस जीन की मदद से आलू की नई प्रजाति विकसित की गई। इसे ट्रायल करने लिए हिमाचल ने अनुमति दे दी है। अब केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी का इंतजार है।
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हिमाचल ने 1968 में तैयार की थी ज्योती प्रजाति

शिमला स्थित केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान की ओर से 1968 में ज्योति प्रजाति की आलू हिमाचल प्रदेश के लिए विकसित की गई थी। यह काफी सफल भी रही थी।

बाद में यह देश के दूसरे हिस्सों में काफी प्रयोग में लाई गई। इस प्रजाति की आलू आज भी बाजार में उपलब्ध है। इसी प्रजाति की आलू से नई किस्म विकसित की जा रही है।

यह देखना रोचक होगा कि नई किस्म किसानों के लिए कितनी फायदेमंद रहती है। बहरहाल, इसे लेकर अभी से लोग उत्साहित लग रहे हैं।
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