शिमला समझौता का टेबल राजभवन में धरोहर के तौर पर रखा
शिमला समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए इस्तेमाल किया गया टेबल राजभवन में धरोहर के तौर पर रखा गया है। राजभवन आने वाले हर व्यक्ति की नजर बरबस ही उस टेबल पर जाती है। यहां आने वाले सभी लोग टेबल के साथ फोटो भी लेते हैं। टेबल पर भारत और पाकिस्तान के झंडे स्मृति के तौर पर रखे गए थे। जिस ओर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी बैठी थीं, वहां भारत का तिरंगा और जिस ओर तत्कालीन पाकिस्तान के राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो बैठे थे, वहां पाकिस्तान का झंडा परचमे सितारा रखा गया था। अब इस टेबल की शान केवल तिरंगा बढ़ा रहा है।
क्या है शिमला समझौता
1971 में भारत-पाक युद्ध के दौरान पाक के 90 हजार से ज्यादा सैनिकों को भारतीय सेना ने युद्ध बंदी बनाया था। इसके बाद भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में सुधार, पाकिस्तानी युद्ध बंदियों की रिहाई की कवायद शुरू हुई। दोनों देशों के बीच बेहतर संबंध के लिए 2 जुलाई, 1972 को शिमला में समझौता हुआ। दोनों देशों ने 17 सितंबर, 1971 को युद्ध विराम के रूप में मान्यता दी। तय हुआ कि समझौते के 20 दिनों के अंदर दोनों देशों की सेनाएं अपनी-अपनी सीमा में चली जाएंगी। दोनों देशों/सरकारों के अध्यक्ष भविष्य में भी मिलते रहेंगे। संबंध सामान्य बनाए रखने के लिए दोनों देशों के अधिकारी बातचीत करते रहेंगे। दोनों देश सभी विवादों और समस्याओं के शांतिपूर्ण समाधान के लिए सीधी बातचीत करेंगे। तीसरे पक्ष की ओर से कोई मध्यस्थता नहीं की जाएगी। यातायात की सुविधाएं स्थापित की जाएंगी, ताकि दोनों देशों के लोग आसानी से आ-जा सकें। जहां तक संभव होगा, व्यापार और आर्थिक सहयोग फिर से स्थापित किए जाएंगे।