शारदीय नवरात्र को लेकर राजधानी शिमला के देवालयों में आजकल रौनक है। लोग कोरोना संक्रमण के खतरे के बावजूद मंदिरों में जाकर पूजा अर्चना कर रहे हैं। नवरात्र 17 अक्तूबर से शुरू हुए थे। इस बार अधिक मास के कारण नवरात्र का पर्व करीब एक महीने देरी से शुरू हुआ था। कई बार की तरह इस बार भी अष्टमी, नवमी और दशमी की तिथि को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
लोग नौ दिनों तक उपवास और आराधना करते हैं, इनमें से बहुत लोग अष्टमी या नवमी तिथि पर कन्या पूजन कर माता की विदाई करते हैं। राधाकृष्ण मंदिर के पुजारी उमेश नौटियाल ने बताया कि लोगों में कन्या पूजन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में इस बार अष्टमी तिथि 23 अक्तूबर शुक्रवार सुबह 6 बजकर 57 मिनट से शुरू होगी जो शनिवार 24 अक्तूबर सुबह 6:58 बजे तक रहेगी।
बताया कि जो लोग कन्या पूजन करना चाहते हैं, वह शुक्रवार को पूरा दिन यह पूजा कर सकते हैं। वहीं नवमी तिथि शनिवार सुबह 7 बजे से लेकर रविवार सुबह 7 बजकर 42 मिनट तक रहेगी। ऐसे में नवमी तिथि भी पूरे दिन रहेगी। इसके बाद दशमी तिथि का आरंभ होगा और यह सोमवार सुबह 9 बजे समाप्त होगी।
मां चामुंडा को लगेगा 108 व्यंजनों का भोग
श्री चामुंडा नंदीकेश्वर धाम में चल रहे शारदीय नवरात्र के बारे में आचार्य बाल मुकुंद कोरला ने बताया कि वीरवार को यज्ञशाला के हवन कुंड में अग्नि स्थापित कर दी गई है। इसके चलते मुख्य यजमान राम कृष्ण और सहायक यजमान हिमांशु अवस्थी ने यज्ञशाला में कात्यायनी मां की पूजा की। उन्होंने बताया कि वीरवार को छठा और सातवां नवरात्र इकट्ठा होने के कारण शुक्रवार को अष्टमी होगी। रात को मां चामुंडा का पूजन कर मां का पुराना सिंदूर निकालकर नया सिंदूर अर्पित किया जाएगा। 12 बजे मां चामुंडा को 108 प्रकार के देसी घी के व्यंजनों का भोग मा के चारणों में अर्पित किया जाएगा।