नरेंद्र मोदी बेशक देश के नए प्रधानमंत्री बन गए हों, लेकिन हिमाचल को उनकी नई सरकार से निराशा हाथ लगी है। मोदी के 46 मंत्रियों में 4 सांसदों वाले पहाड़ी राज्य हिमाचल से एक भी कैबिनेट या राज्य मंत्री नहीं है।
हालांकि इससे पहले उम्मीद थी कि कांगड़ा से सांसद शांता कुमार या हमीरपुर से सांसद अनुराग ठाकुर में से कोई मंत्री जरूर बनेगा। इस उम्मीद के कारण भी थे।
वाजपेयी सरकार में शांता कुमार खाद्य एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय संभाल चुके थे। दूसरी ओर अनुराग ठाकुर भाजयुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। वह लगातार हैट्रिक के बाद लोकसभा पहुंचे थे।
उम्र ज्यादा होने के कारण चूके शांता
माना जा रहा है कि शांता कुमार उम्र ज्यादा होने के कारण मंत्रिमंडल से चूक गए, जबकि अनुराग ठाकुर को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। भाजपा सूत्रों का कहना है कि राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और छतीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह के बेटों को मंत्रिमंडल में लेने के दबाव में अनुराग ठाकुर का नाम भी उलझ गया।
एक चर्चा ये भी है कि शांता कुमार को एडजस्ट करने के बाद अनुराग ठाकुर मंत्री बनाए जा सकते हैं। शांता का नाम योजना आयोग के लिए भी चल रहा है। पार्टी के भीतर ये चर्चा भी है कि मोदी ने चूंकि सभी सांसदों का प्रोफाइल पहले देखा था।
एफआईआर के कारण कटा अनुराग का पत्ता
हो सकता है कि अनुराग ठाकुर पर दर्ज विजिलेंस की एफआईआर के कारण उनका पत्ता कटा हो। पिछले एक साल में अनुराग पर 6 एफआईआर हिमाचल सरकार ने दर्ज की हैं। हालांकि अनुराग ठाकुर के मंत्री बनने की संभावना को देखते हुए उनके पिता प्रेम कुमार धूमल और माता शीला धूमल भी दिल्ली गई थीं।
हिमाचल भाजपा को अब जेपी नड्डा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का इंतजार है। शपथ ग्रहण में शामिल हुए भाजपा अध्यक्ष सतपाल सत्ती ने कहा कि हिमाचल, उत्तराखंड और राजस्थान जैसे कई राज्यों को अभी प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। हमें कैबिनेट विस्तार में जगह मिलने की अब भी उम्मीद है। नरेंद्र मोदी हिमाचल को खाली नहीं छोड़ेंगे।