सिरमौर के नाहन में सत्र एवं विशेष न्यायाधीश देविंद्र कुमार शर्मा की अदालत ने दुष्कर्म का अभियोग साबित होने पर एक दोषी को सात साल कठोर कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी को तीस हजार जुर्माना भी भरना होगा। जुर्माना नहीं देने की स्थिति में आरोपी को एक वर्ष की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।
मामला वर्ष 2012 में दर्ज हुआ था। मामले की पैरवी कर रहे जिला न्यायवादी मोहिंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि दोषी 16 सितंबर को एक नाबालिग को शादी का झांसा देकर अपने साथ विकासनगर ले गया। जहां पर एक गेस्ट हाउस में रहे।
इसके बाद वह उसे लेकर पांवटा साहिब वापस आया और एक सरायं में ठहरे। जहां पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया गया। 18 सितंबर 2016 को दोषी ने पीड़िता को बताया कि वह पहले से ही शादीशुदा है और उसके दो बच्चे भी हैं। लिहाजा, वह उससे शादी नहीं कर सकता।
वह पीड़िता लड़की को पांवटा बस स्टैंड पर छोड़कर वहां से चला गया। इसी दिन लगभग 11 बजे पुलिस ने जब उसे बस स्टैंड में रोते हुए देखा तो थाने लेकर आई। इसके बाद पीड़िता की माता और भाई को पुलिस थाना बुलाया गया।
बयान दर्ज करने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया और आरोपी की गिरफ्तारी हुई। एएसआई अशोक कुमार ने मामले की जांच पूरी करने के बाद इसका चालान अदालत में पेश किया।
इस मामले की पैरवी के दौरान अदालत में कुल 18 गवाह पेश किए गए। दोष साबित होने पर अदालत ने आरोपी को सात साल कठोर कारावास और 30 हजार रुपये जुर्माना भरने की सजा सुनाई।