एचपीयू में यूजीसी नियमों को दरकिनार कर चहेतों को पीएचडी में प्रवेश देने का खुलासा हुआ है। विश्वविद्यालय के रिसर्च स्कालर्स ने आरटीआई से जुटाई जानकारी के माध्यम से यह आरोप लगाए हैं।
छह मामलों पर विवि प्रबंधन को कठघरे में खड़ा किया है। पत्रकारों से बातचीत में शोधार्थी संघ के सचिव नोबल ठाकुर, उपाध्यक्ष अनिल नेगी ने कहा कि अधिकतर मामले एमसीए के हैं।
जिसमें डीएस स्वयं शिक्षक हैं। इस दौरान करीब दो वर्ष पूर्व उठाए गए वाणिज्य विभाग में दर्शन निष्णांत में पीएचडी की थीसिस मात्र 11 महीने में जमा करवाने का मामला उठाया।
इसे उन्होंने विवि आर्डिनेंस 16.13 की अनदेखी करार दिया। पीएचडी थीसिस की न्यूनतम अवधि तीन वर्ष तय है। इसे दरकिनार किया गया। मामला गरमाने के बावजूद आज तक इस मामले के जिम्मेदार डीन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।