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Shimla News: आपदा को लेकर राजधानी में संवेदनशील इलाके चिह्नित, अब बनेगा राहत का प्लान

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भूकंप, भूस्खलन, बाढ़ जैसी आपदाओं को लेकर शिमला शहर के 34 वार्डों का किया गया सर्वेक्षण, रिपोर्ट तैयार
घनी आबादी वाले इलाकों में ओपन रेस्क्यू सेंटर के लिए स्कूल, सामुदायिक भवन, स्वास्थ्य केंद्र और मैदान किए गए चिह्नित
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। भूकंप, भूस्खलन, बाढ़, आग जैसी आपदाओं को लेकर राजधानी के संवेदनशील इलाकों का सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है। पहली बार शहर में वार्ड स्तर पर किए गए इस सर्वेक्षण में आपदाओं से निपटने और वार्डों में रेस्क्यू सेंटर बनाने के लिए भी नए सिरे से स्थान चिह्नित कर लिए गए हैं। स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स के सर्वेक्षण की इस रिपोर्ट के आधार पर अब नगर निगम राहत देने के लिए अपना मास्टर प्लान बनाएगा। इस मास्टर प्लान में संवेदनशील इलाकों तक पहुंचने के रास्ते चिह्नित और विकसित होंगे। भवन निर्माण को सीमित करने को लेकर योजना बनेगी। साथ ही आपदा आने पर इनसे निपटने के लिए जरूरी सेवाओं को मजबूत किया जाएगा। राजधानी में नगर निगम ने आखिरी बार साल 2020-21 में सिटी डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान तैयार किया था। इसके बाद समरहिल के शिव बावड़ी, कृष्णानगर, रामचंद्र चौक समेत कई इलाकों में बड़े पैमाने पर भूस्खलन की घटनाएं हो चुकी हैं।
शहर में आपदा से निपटने के लिए तैयारियों को और बेहतर कैसे किया जाए, इसको लेकर अब दोबारा से सर्वेक्षण किया गया है। इसी साल मानसून सीजन के दौरान एसडीआरएफ की टीम ने शहर के वार्डों में जाकर सर्वेक्षण किया था। पार्षदों के साथ किए गए इस सर्वेक्षण में हर वार्ड में ऐसे स्थान चिह्नित किए गए हैं जो भूकंप, भूस्खलन जैसी आपदा को लेकर संवेदनशील हैं। इसकी बाकायदा फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी की गई है। शहर के किस वार्ड में क्या अहम इमारतें हैं, कौन-कौन से इलाके घनी आबादी वाले हैं, इन सभी को रिपोर्ट में शामिल किया गया है। हालांकि, आपदा की दृष्टि से कौन-कौन से क्षेत्र संवेदनशील श्रेणी में हैं, इसकी रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। इसे जल्द ही नगर निगम, राज्य आपदा प्रबंधन को सौंपा जाना है।
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हर वार्ड में चिह्नित किए गए रेस्क्यू सेंटर
शहर में सभी 34 वार्ड के भीतर रेस्क्यू सेंटर बनाने के लिए स्थान चिह्नित किए गए हैं। ज्यादातर वार्डों में प्राथमिक, माध्यमिक और वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों, स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक भवनों को रेस्क्यू सेंटर के तौर पर चिह्नित किया गया है। शहर के सबसे बड़े उपनगर संजौली में एसपीएम मैदान समेत साथ लगते आईजीएमसी अस्पताल को भी रेस्क्यू सेंटर बनाया जा सकता है। टुटू, न्यू शिमला, समरहिल, कृष्णानगर आदि इलाकों में सामुदायिक भवनों को भी रेस्क्यू सेंटर के तौर पर चिह्नित किया गया है। ये सभी स्थान ऐसे हैं जहां के लिए टीमें आसानी से पहुंच सकें। साथ ही पीड़ित लोगों को इन सेंटरों तक आसानी से पहुंचाया जा सके।

फोरलेन से सटे इलाके भी सर्वे में शामिल
शहर में फोरलेन से सटे इलाकों को भी इस सर्वेक्षण में शामिल किया गया है। ये इलाके भूस्खलन जैसी घटनाओं के लिए संवेदनशील हैं। बरसात के दिनों में इनमें भूस्खलन की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। संजौली, भट्ठाकुफर, शांति विहार समेत साथ लगते वार्ड इनमें शामिल हैं।
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कोट
आपदा से निपटने के लिए बनेगी योजना
शहर में आपदा से निपटने का जिम्मा अब नगर निगम के पास है। आपदा को लेकर किए गए सर्वेक्षण से रेस्क्यू करने जैसे कामों में मदद मिलेगी। निगम इस रिपोर्ट पर काम करेगा ताकि राहत की योजनाएं तैयार हो सकें। -डॉ. भुवन शर्मा, अतिरिक्त आयुक्त, नगर निगम शिमला
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