शिमला निवासी वरिष्ठ कथाकार एसआर हरनोट की पर्यावरण और वन माफिया पर लिखी गई बहुचर्चित कहानी ‘आभी’ को बंगलूरू स्थित जैन विश्वविद्यालय ने अपने हिंदी पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय लिया है।
विश्वविद्यालय के बीकॉम, बीएससी और बीबीएम के छात्रों के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए 2016-2019 तक के हिंदी पाठ्यक्रम में शामिल इस कहानी को जून, 2015 से पढ़ाना शुरू किया जाएगा, जिसकी पाठ्यपुस्तक मई तक प्रकाशित हो जाएगी।
इस तरह हर सेमेस्टर में लगभग 1000 से 1200 छात्र इस कहानी का अध्ययन कर सकेंगे। यह सूचना जैन विश्वविद्यालय से डा. भंवर सिंह ने हरनोट को दी है। आभी कहानी हरनोट ने जिला कुल्लू में स्थित जलोड़ी पास से पांच किलोमीटर दूर सरेओलसर लेक के आसपास पाई जाने वाली आभी चिड़िया को लेकर लिखी है।
जो सदियों से झील को साफ-सुथरा रखे हुए है। हरनोट ने इस कहानी के बहाने जहां पर्यावरण को बचाने की चिंता व्यक्त की है, वहीं वन माफियाओं से वनों को बचाने की सतर्क ता भी चिन्हित की है।
‘आभी’ कहानी हिंदी साहित्य की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘पहल’ में प्रकाशित होते ही चर्चित हुई थी, जिसे बाद में हरनोट के आधार प्रकाशन से प्रकाशित कहानी संग्रह ‘लिटन ब्लॉक’ में शामिल किया गया।