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निस्वार्थ कर्म ही सच्चे जीवन का सार : नड्डा

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डिग्गर गांव में श्रीमद भागवत कथा के बाद भजन संध्या करते हुए आचार्य भगत राम नड्डा और अन्य। संवाद
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डिग्गर गांव में श्रीमद्भागवत कथा में जीवन के उद्देश्य बताए
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आचार्य बोले, कर्म ऐसा करो जो निष्काम हो


संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। ग्राम पंचायत बैरी रजादियां के डिग्गर गांव में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरा दिन आचार्य भगत राम नड्डा ने जीवन के उद्देश्य, निष्काम कर्म और सच्ची भक्ति के स्वरूप की जानकारी दी।
कथावाचक ने कहा कि मनुष्य का वास्तविक कर्तव्य क्या है, इसका बोध श्रीमद्भागवत कथा सुनकर ही होता है। उन्होंने कहा कि यह जीवन क्षणभंगुर है, किंतु मनुष्य मृत्यु की निश्चितता को स्वीकार नहीं करता। जो व्यक्ति निष्काम भाव से प्रभु का स्मरण करता है, वह अपने जन्म और मरण दोनों को सफल बना लेता है।
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नड्डा ने कहा कि ईश्वर की भक्ति में लीन होकर किया गया निस्वार्थ कर्म ही सच्चे जीवन का सार है। उन्होंने बताया कि जब भगवान अवतार लेते हैं तो वे अपनी माया के साथ आते हैं, किंतु साधारण मनुष्य उसी माया को शाश्वत मानकर शरीर को ही प्रधान समझ लेता है, जबकि शरीर नश्वर है और आत्मा अमर। आचार्य ने कहा कि भागवत पुराण का संदेश है कि कर्म ऐसा करो जो निष्काम हो, जिसमें फल की इच्छा न हो। यही सच्ची भक्ति और धर्म का मूल है।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन के सत्य और उद्देश्य का ज्ञान कराने वाला ग्रंथ है। यह बताती है कि धर्म और अधर्म में क्या अंतर है और किस प्रकार व्यक्ति भक्ति, ज्ञान और वैराग्य से मोक्ष की राह पर अग्रसर हो सकता है।
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कथा स्थल पर दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। महिलाएं मंगल गीत गाती हुईं भक्ति में लीन रहीं। युवाओं ने भी भक्ति भाव से कथा श्रवण किया। कथा समाप्ति के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। आयोजक पंडित जीवानंद शैल ने बताया कि कथा का उद्देश्य केवल श्रवण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके संदेशों को जीवन में अपनाना ही सच्चा धर्म है।
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