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हिमाचल के हजारों सहजधारी सिखों को झटका

Tue, 10 May 2016 12:11 AM IST
पंकज चब्बा/अमर उजाला, संतोषगढ़ (ऊना)
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सहजधारी सिख शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के चुनाव में मतदान नहीं कर सकेंगे। - फोटो : डेमो पिक
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राष्ट्रपति से सिख गुरुद्वारा संशोधन अधिनियम 2016 को मंजूरी मिलने से हिमाचल के हजारों सहजधारी सिखों को बड़ा झटका लगा है। ये अब सिख पंथ की सर्वोच्च धार्मिक संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के चुनाव में मतदान नहीं कर सकेंगे। एसजीपीसी के लिए हिमाचल से भी एक सदस्य चुना जाता है।
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2011 के एसजीपीसी चुनाव में अकाली दल बादल से संबंधित सरदार दलजीत सिंह भिंडर यहां से सदस्य चुने गए थे। प्रदेश के आठ जिलों ऊना, सोलन, कांगड़ा, चंबा, हमीरपुर, कुल्लू , लाहौल स्पीति और मंडी जिलों में लगभग 24,000 सिख मतदाता हैं। ऊना और सोलन जिलों में सिख मतदाताओं की संख्या सर्वाधिक है।

सहजधारियों के साथ-साथ धूम्रपान और शराब पीने वाले सिख भी पंथ से जुड़े धार्मिक निकायों के चुनाव में वोट नहीं डाल सकते। प्रदेश में कुल 24 हजार सिख मतदाता हैं, जिनमें से आठ से दस हजार सहजधारी हैं। उल्लेखनीय है कि एसजीपीसी के लिए वर्ष 2004 एवं 2011 के चुनावों में सहजधारी सिखों को संस्था के चुनाव में वोट के हक से वंचित कर दिया गया था।
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इस पर सहजधारी सुप्रीम कोर्ट चले गए। अब इसी बीच विधेयक पारित होने से सहजधारियों को तगड़ा झटका लगा है। विधेयक को मंजूरी मिलना प्रशंसनीय- वर्ष 2011 के एसजीपीसी चुनाव में प्रदेश से चुने गए सदस्य सरदार दलजीत सिंह भिंडर ने सिख गुरुद्वारा अधिनियम 2016 को मंजूरी मिलने को प्रशंसनीय फैसला करार देते हुए कहा कि इस फैसले से पंथ में पारदर्शिता बढ़ेगी। पंथ एवं धर्म के प्रति निष्ठा और सम्मान बढ़ेगा।

गुरु घर से जुड़ी है सहजधारियों की आस्था- सहजधारी सिखों में शामिल एवं जिला परिषद के उपाध्यक्ष रहे अवतार सिंह का कहना है कि भाजपा एवं अकाली दल ने सिखों को दो गुटों में बांटने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि चाहे सिख सहजधारी हैं मगर उनकी आस्था गुरु घर से जुड़ी है। सहजधारियों को अपनी ही धार्मिक संस्थाओं से विमुख करना सिखों को बांटने की साजिश है।

सहजधारियों में ये सिख शामिल- सिख गुरुद्वारा संशोधन अधिनियम 2016 के मुताबिक ऐसे सिख जिन्होंने अपने केश कटवा लिए हैं और जो शराब या धूम्रपान करते हैं, वे सहजधारी माने जाएंगे। हालांकि केश कटवाने वाले सिखों ने गुरु घर की आस्था की दलील देते हुए पूर्व में इस फैसले को चुनौती थी।

जिस पर अभी निर्णय आना बाकी है। गुरुद्वारा सिंह सभा संतोषगढ़ के प्रधान एवं एसजीपीसी के पदाधिकारी सरदार मास्टर जागीर सिंह का कहना है कि नया कानून बनने से एसजीपीसी की लंबे समय से चल रही वैधानिक स्थिति भी साफ हो जाएगी। उन्होंने नए कानून को पंथ के हक में बताया है।
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