साल 2010-11 में धारा 118 के तहत गैर कृषकों को हिमाचल में जमीन खरीदने की ढाई सौ से ज्यादा अनुमति देने के मामले में राज्य चुनाव आयुक्त पार्थ सारथी मित्रा की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। विजिलेंस मुख्यालय में दो बार पूछताछ के बाद तत्कालीन प्रधान सचिव राजस्व रहे मित्रा को ब्यूरो मामले में आरोपी बनाने जा रहा है। ब्यूरो ने इसके लिए सरकार से अनुमति मांगने की तैयारी कर ली है।
ब्यूरो के इस कदम के साथ ही मित्रा पर गिरफ्तारी की तलवार लटक सकती है। दरअसल, विजिलेंस जिस मामले की जांच कर रही है वह वर्तमान राज्य चुनाव आयुक्त पार्थ सारथी मित्रा के प्रधान सचिव राजस्व रहने के दौरान का है। चूंकि इस मामले में अभी तक वह न तो आरोपी थे और न ही उनके खिलाफ ठोस सबूत था।
ऐसे में ब्यूरो महज सामान्य पूछताछ के लिए उन्हें बुलाया जा रहा था। लेकिन सूत्रों की मानें तो अब ब्यूरो को उनके खिलाफ पुख्ता सबूत हाथ लगने की बात कही जा रही है। जिसके बाद अब ब्यूरो उन्हें आरोपी के तौर पर जांच में शामिल करने की तैयारी में है।
इसी को देखते हुए ब्यूरो सरकार से मित्रा से बतौर आरोपी पूछताछ व अन्य कार्यवाही करने की मंजूरी मांगने की तैयारी में है। शासन के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो मित्रा के वर्तमान में राज्य चुनाव आयुक्त के संवैधानिक पद पर आसीन होने के चलते गिरफ्तारी से पहले सरकार से अनुमति लेना आवश्यक होगा।
ऐसे में ब्यूरो गिरफ्तारी के बजाय पहले ही आरोपी के तौर पर पूछताछ व अन्य कार्यवाही के लिए अनुमति मांग रहा है। सूत्रों का कहना है कि अगर सरकार ब्यूरो को मित्रा को आरोपी के तौर पर देखने की मंजूरी देती है तो इसके बाद ब्यूरो को गिरफ्तारी तक के लिए भी मंजूरी नहीं लेनी होगी। हालांकि चार्जशीट दाखिल करने से पहले जरूर ब्यूरो को सरकार से अभियोजन स्वीकृति की जरूरत पड़ेगी।