पार्थ सारथी मित्रा (फाइल फोटो)
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धारा-118 के तहत गैर कृषकों को हिमाचल में जमीन खरीदने की अनुमति देने के नाम पर हुए कथित भ्रष्टाचार मामले में प्रदेश के मुख्य चुनाव आयुक्त व पूर्व मुख्य सचिव पार्थ सारथी मित्रा और उनके साथी विनोद मित्तल की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। अंतरिम जमानत हासिल करने के बावजूद विजिलेंस सूत्रों की मानें तो अब तक की जांच में वॉयस सैंपल अहम साबित हुए हैं।
विजिलेंस के पास जो कॉल रिकॉर्डिंग है, उसमें मौजूद आवाजों का आरोपियों के वॉयस सैंपल की आवाजों से मिलान कराया जा चुका है और दोनों की आवाज रिकॉर्डिंग की आवाज से मिलने की बात कही जा रही है। अब मित्रा और मित्तल के खिलाफ विजिलेंस कोर्ट में जल्द चालान पेश कर सकती है।
सूत्रों का कहना है कि चूंकि ब्यूरो की ओर से हाईकोर्ट में सही पैरोकारी नहीं हो सकी, जिससे पहले मित्रा और फिर मित्तल को अंतरिम जमानत मिल गई। अब ब्यूरो कोर्ट में दोनों के खिलाफ चालान पेश कर गिरफ्तारी के लिए नए सिरे से प्रयास कर सकती है और फिर से मित्रा और मित्तल से पूछताछ की जा सकती है। मित्रा के अलावा पांच आरोपियों अशोक सिंघल, विवेक डोगरा, रमेश गुप्ता, एमके जैन और प्रदीप कुमार के वॉयस सैंपलों का मिलान ब्यूरो के पास पहले से मौजूद एक फोन रिकॉर्डिंग से किया गया है।
मित्रा के कार्यकाल में हुआ था भ्रष्टाचार
मित्रा के प्रमुख सचिव राजस्व रहने के दौरान बड़ी संख्या में गैर कृषकों को हिमाचल में जमीन खरीदने के लिए धारा-118 की मंजूरी दी गई। आरोप है कि इसमें पांच से दस लाख रुपये तक घूस ली गई। अकेले 2010 में ही ढाई सौ से ज्यादा मामलों में 118 के तहत अनुमति दी।
पी मित्रा समेत कई अधिकारियों, कर्मचारियों व रिटायर कर्मियों से विजिलेंस घंटों पूछताछ कर चुकी है। पालीग्राफी टेस्ट की अनुमति मांगी थी, लेकिन मित्रा के इंकार के बाद पेच फंस गया था।