शिमला में फैले पीलिया के कारणों की तह तक जाने के लिए एसआईटी ने जांच तेज कर दी है। ढली थाना पुलिस ने शनिवार को आईपीएच के एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) मल्याणा के एसडीओ को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की छानबीन कर रही एसआईटी के इंचार्ज एएसपी संदीप धवल और थाना प्रभारी पीडी ठाकुर ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि गिरफ्तार किए गए एसडीओ एचसी चौहान को रविवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा। बहरहाल, अब तक इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
वहीं इस मामले में अब तक आईपीएच एक्सईएन अभी तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। वहीं इस मामले में शुक्रवार को गिरफ्तार किए गए एसटीपी के ठेकेदार की को शनिवार को कोर्ट में पेश किया गया। यहां से उसे दो फरवरी तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। मल्याणा प्लांट में सीवर को ट्रीट करने में गड़बड़ी की की छह जनवरी को दर्ज शिकायत के बाद अब तक पुलिस ने प्लांट के सुपरवाइजर, कनिष्ठ अभियंता को 21 जनवरी को गिरफ्तारी की थी। शुक्रवार को पुलिस ने ठेकेदार की गिरफ्तारी की। अब शनिवार को इस मामले एसडीओ की चौथी गिरफ्तारी है। अभी प्लांट संचालन और देखरेख के लिए जिम्मेदार माने गए एक्सईएन पुलिस की गिरिफ्त से बाहर हैं।
चीफ इंजीनियर और एसई से पांच घंटे पूछताछ
मल्याणा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के संचालन में बरती गई लापरवाही को लेकर शनिवार को एसआईटी ने आईपीएच के चीफ इंजीनियर और एसई से लंबी पूछताछ की। करीब पांच घंटे तक चली पूछताछ के दौरान अधिकारियों से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के संचालन से संबंधित सवाल पूछे गए। पुलिस अधीक्षक डीडब्लू नेगी ने भी मामले को लेकर पूछताछ की।
सुबह ग्यारह बजे से लेकर दोपहर बाद करीब चार बजे तक दोनों अधिकारी एसपी कार्यालय में ही रहे। उनसे एसआईटी इंचार्ज एएसपी संदीप धवल और अन्य टीम में शामिल अधिकारियों ने प्लांट संचालन, इसमें किस कर्मी की क्या जिम्मेदारी रहती थी, इससे संबंधित सवाल पूछे। सूत्रों की माने तो लंबी चली इस पूछताछ के दौरान अश्वनी खड्ड में मिली गंदगी के लिए बताए कारणों से संबंधित मीडिया में चीफ इंजीनियर के हवाले से छपे बयानों से संबंधित सवाल भी किए गए।
सुबह ग्यारह बजे ही पुलिस की एसआईटी द्वारा बुलाए जाने पर आईपीएच विभाग के चीफ इंजीनियर आरएम मुकुल और अधीक्षण अभियंता धनराज गिल एसपी कार्यालय पहुंचे। यहां पर एसआईटी के अधिकारियों ने आईपीएच के इन अधिकारियों से ट्रीटमेंट प्लांट में सीवर को ट्रीट न किए जाने के मिले साक्ष्यों और उससे शहर भर में फैले पीलिया से संबंधित सवाल किए। अधिकारियों ने प्लांट में सीवर ट्रीट करने को लगाए गए कर्मचारियों सहित इसकी देखरेख के लिए जिम्मेदार अधिकारियों का ब्योरा भी मांगा।
अब तक सिर्फ उन्हीं लोगों से पूछताछ की गई है, जो सीधे तौर पर प्लांट संचालन और उसकी देखरेख के लिए जिम्मेदार थे। पुलिस फिलहाल जांच को सीधे तौर पर प्लांट को चलाने और उसकी देखरेख करने वाले अधिकारियों तक की जांच कर रही है। इसी आधार पर आईपीएच के सुपरवाइजर, जेई, एसडीओ और एक्सईएन को लापरवाही के लिए जिम्मेदार मानते हुए आरोपी बनाया गया है। इनमें से सुपरवाइजर और जेई की पहले ही गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच में सामने आया है कि प्लांट को चलाने और ट्रीटमेंट के कार्य एक्सईएन स्तर के अधिकारी तक की देखरेख में ही होता था। पहले दौर में एसआईटी में शामिल अधिकारियों ने और दोपहर बाद एसपी ने भी इन अधिकारियों से मामले को लेकर पूछताछ की।
प्लांट के ठेकेदार को किया अदालत में पेश
आईपीएच विभाग के चीफ इंजीनियर और एसई से एसआईटी ने विभाग की कार्यप्रणाली और खासकर किस स्तर पर किस अधिकारी की जवाबदेही बनती है, इसको लेकर जानकारी जुटाई है। टीम ने विभाग के आला अधिकारियों से जानने की कोशिश है कि पानी की लिफ्टिंग से लेकर पानी की ट्रीटमेंट और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को मानकों के तहत काम करवाने का किस किस अधिकारी के पास जिम्मा होता है। इसके साथ ही अधिकारियों से विभागीय कार्रवाई के तहत निलंबित किए गए अधिकारियों की मामले में संलिप्तता को लेकर भी सवाल पूछे गए। ऐसे में साफ है कि आने वाले समय में विभाग के उन अधिकारियों पर भी गाज गिरना तय है, जिनकी शहर के लोगों को साफ पानी मुहैया करवाने की जिम्मेदारी थी।