सर्वे किया तो पता चला कि हिमाचल के उद्योगों से ही सालाना करीब 500 करोड़ का स्क्रैप निकलता है, जिसका ट्रेड अव्यवस्थित है। बस यहीं से उन्होंने इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया।
इसे तैयार करने में उन्हें नौ महीने लगे। प्रोजेक्ट फीचर के मुताबिक स्क्रैबिड अपने यूजर्स को स्क्रैप डीलर्स और स्क्रैप मार्केट का बड़ा नेटवर्क उपलब्ध करवाएगा।
इससे स्क्रैप ऑर्डर हासिल करने की मारामारी जहां खत्म होगी, वहीं बिचौलियों की भी छुट्टी होगी। यह प्रोजेक्ट मुख्यमंत्री स्टार्टअप स्टीम के तहत पंजीकृत है, जिसके तहत उन्हें 25000 रुपये मासिक का प्रोत्साहन भत्ता भी मिल रहा है।
पांवटा के गोंदपुर में स्क्रैप मैटेरियल ट्रेडिंग के नए स्टार्टअप प्रोजेक्ट स्क्रैबिड का गत दिवस आयोजन हुआ, जिसमें इस प्रोजेक्ट को लांच किया। इस अवसर पर 30 से अधिक प्रतिष्ठित कंपनियों ने भाग लिया।
चैंबर ऑफ कॉमर्स पांवटा के अध्यक्ष सतीश गोयल और अरुण गोयल ने स्क्रैबिड मोबाइल एप वीटा वर्जन की लांचिंग की। इसके पूर्ण संस्करण को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर शीघ्र ही लांच करेंगे। स्क्रैबिड के फाउंडर प्रफुल को हिमाचल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने सबसे कम उम्र के उद्यमी की सदस्यता प्रदान की है।