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टीसीपी में नहीं रहना चाहते 85 गांवों के लोग, ये है वजह

Mon, 04 Mar 2019 10:57 AM IST
ashok chauhan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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हिमाचल में 85 गांव ऐसे हैं जो टीसीपी में नहीं रहना चाहते हैं। इन लोगों ने पंचायत के माध्यम से सरकार से टीसीपी से बाहर करने की गुहार लगाई है। बीते शुक्रवार को हुई कैबिनेट की बैठक में भी इस मामले पर चर्चा हुई है।

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कैबिनेट में टीसीपी के  नियमों को सरल करने और गांवों को टीसीपी से बाहर करने पर सहमति बनी है। प्रदेश सरकार ने 54 शहरों को टीसीपी में शामिल किया है। जिन शहरों की संख्या कम थी, उनकी संख्या पूरी करने के लिए पंचायतों को इन शहरों में मिला दिया गया।

अब ये पंचायतें टीसीपी में शामिल होकर घुटन महसूस कर रही हैं। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बीते महीनों कुल्लू दौरे के दौरान लोगों को आश्वस्त किया था कि टीसीपी में शामिल किए गए नए क्षेत्रों के बारे में सरकार उचित निर्णय लेगी। शहरी विकास मंत्री सरवीण चौधरी की ओर से इस प्रस्ताव को कैबिनेट की बैठक में लाया गया। 

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सुविधा मुहैया कराने को टीसीपी में मिलाया था पंचायतों को 

टीसीपी में कुल्लू, मनाली, मणिकर्ण, हमीरपुर, धर्मशाला, कांगड़ा, शिमला, रोहडू, रामपुर आदि क्षेत्रों से आवेदन आए थे। ये आवेदन टीसीपी कार्यालय से सचिवालय को भेजे गए।

नक्शा पास कराना पड़ रहा लोगों को 
पंचायतों के लोग टीसीपी के कायदे-कानून से परेशान हैं। लोगों को भवन निर्माण के लिए टीसीपी से नक्शे पास कराने पड़ रहे हैं। अगर निर्माण नक्शे से बाहर होता है तो बिजली और पानी के कनेक्शन नहीं दिए जा रहे हैं। 
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