शिक्षा विभाग में प्रवक्ता से प्रधानाचार्य की पदोन्नति का कोटा साठ फीसदी करने पर शिक्षक अड़ गए हैं। स्कूल प्रवक्ता संघ ने उच्च शिक्षा निदेशक को मुख्यमंत्री जयराम की घोषणा याद दिलाते हुए इसकी अधिसूचना जारी करने की मांग की है। संघ का कहना है कि 19 हजार प्रवक्ताओं के लिए मात्र 750 पदोन्नति पद न्यायसंगत नहीं है।
हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ की एक बैठक उच्च शिक्षा निदेशक के साथ शिक्षा निदेशालय में हुई। बैठक में प्रवक्ताओं से प्रधानाचार्य पद के लिए पदोन्नति कोटा 50 फीसदी से 60 फीसदी करने बारे मुख्य रूप से चर्चा हुई। संघ के अध्यक्ष केसर सिंह ठाकुर ने बताया कि मुख्यमंत्री ने 23 नवंबर 2018 को संघ के पालमपुर अधिवेशन में यह घोषणा की थी।
संघ के पदाधिकारियों ने कहा की प्रवक्ताओं को पहले ही अपनी संख्या के अनुपात से बहुत कम पदोन्नति कोटा प्राप्त हो रहा है। आरएडंपी नियमों में प्रधानाचार्य पदोन्नति के लिए प्रवक्ता और मुख्याध्यापक दो फीडिंग कैडर हैं। वर्तमान में प्रवक्ताओं कि सख्या 19 हजार है और मुख्य अध्यापकों की सख्या लगभग 800 है।
प्रधानाचार्य के 95 फीसदी पद प्रवक्ताओं से और 5 फीसदी पद मुख्याध्यापकों से भरे जाने चाहिए। 1986 में जब नयी शिक्षा नीति के तहत माध्यमिक विद्यालयों की स्थापना की गई थी तो ये अनुपात 60 :40 का था। उस समय प्रदेश में मात्र 236 प्रवक्ता काम कर रहे थे जबकि मुख्य अध्यापकों की संख्या 1459 थी। यह तय किया गया था कि प्रवक्ताओं की संख्या में जैसे इजाफा होगा वैसे प्रधानाचार्य पदों के लिए कोटे का दोबारा निर्धारण संख्या आधार पर किया जाता रहेगा।
अध्यक्ष केसर सिंह ने कहा कि वर्ष 2007 में प्रवक्ताओं की संख्या 12 हजार पहुंच गई और मुख्याध्यापकों की संख्या 1100 के लगभग थी। तब भी पदोन्नति का कोटा दोबारा निर्धारित नहीं हो पाया। 2008 में पदोन्नति कोटा 50:50 किया गया।
प्रवक्ताओं को खुश करने के लिए हजारों शिक्षकों को नाराज नहीं करे प्रदेश सरकार
उच्च शिक्षा निदेशक अमरजीत शर्मा को राजकीय टीजीटी कला संघ ने सोमवार को 30 सूत्रीय मांग-पत्र सौंपा । संघ के प्रदेश महासचिव विजय हीर ने निदेशालय में टीजीटी कला शिक्षकों की मांगों से अवगत करवाया। 1948 मिडल स्कूलों में हेडमास्टरों के पद सृजित करवाना, 20 साल सेवाकाल पर 2 इंक्रीमेंट, भर्ती पदोन्नति नियमों में बदलाव और टीजीटी शिक्षकों की अन्य मांगों को पूर्ण करने के लिए शिक्षा विभाग का सहयोग मांगा गया।
संघ ने प्रधानाचार्य पद के लिए प्रवक्ता कोटे में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी और हेडमास्टर के कोटे में 10 प्रतिशत कटौती को लागू न करने और इस मामले को वापस सरकार को भेजने की अपील की। हीर ने बताया कि 6 हजार प्रवक्ता को तोहफा देने के लिए 16318 टीजीटी, 933 हेडमास्टरों, 4325 प्रमोटी प्रवक्ता, टीजीटी के पात्र हजारों सीएंडवी और जेबीटी शिक्षकों के हितों से खिलवाड़ करने जैसा है।
इससे करीब 24 हजार शिक्षक प्रत्यक्ष रूप से सरकार से नाराज हो जाएंगे । वर्ष 1992 में 60 प्रतिशत कोटा पाने वाले हेडमास्टरों के लिए अगर कोटा 40 प्रतिशत कर दिया गया तो यह टीजीटी वर्ग से बहुत बड़ा अन्याय होगा। इस निर्णय के बाद प्रदेश के 95 प्रतिशत टीजीटी कभी भी प्रधानाचार्य पद तक प्रमोट नहीं हो सकेंगे।